अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। नकली आडियो सीडी बेचने के आरोप में अदालत ने अभियुक्त को कापीराइट एक्ट के तहत तीन साल कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। यह फैसला आने में 17 साल का समय लगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक नोएडा निवासी टी-सीरीज कंपनी के अधिकारी विपिन विज पुत्र राम विज व नरेश कुमार राठी पुत्र चैनसुख राठी ने कोतवाली पुलिस को गुरहा कुआं बाजार में सुनील गुप्ता पुत्र सच्चिदानंद उर्फ सच्चानंद निवासी कोतवाली रोड द्वारा कंपनी की नकली सीडी बेचने की सूचना दी थी। इस पर 20 सितंबर 2000 को कोतवाली पुलिस ने दुकान में छापा मारकर 222 नकली सीडी बरामद की थी।
बरामदगी के बाद कोतवाली में उप निरीक्षक रवींद्र कुमार मिश्रा ने सुनील के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 व कापी राइट एक्ट की धारा-63 व 68ए के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद उसके विरुद्ध तीनों धाराओं में सीजेएम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। मुकदमें की सुनवाई के दौरान ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने साक्ष्य प्रस्तुत किए। सीजेएम राजेश कुमार ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए सुनील कुमार को कापी राइट एक्ट की धारा 63 व 68ए में तीन-तीन साल की सजा व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। धारा 420 में आरोप साबित नहीं हो सका। फैसले के बाद अभियुक्त को जेल भेज दिया गया।
-17 साल बाद हुआ मुकदमे का फैसला
-टी-सीरीज की नकली सीडी हुई थी बरामद