बांदा। पूर्व जिलाधिकारी डीपी गिरि द्वारा कई गांवों में मनरेगा कार्यों की कराई गई जांच और उसमें पाए गए 20.30 लाख रुपये के दुरुपयोग का मामला अब फिर गरमा गया है। संयुक्त विकास आयुक्त ने सीडीओ को पत्र भेजकर कहा है कि जांच में दोषी पाए गए लोगों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा एक सप्ताह के अंदर पेश करें।
बड़ोखर ब्लाक के छोटा पुरवा के लल्लू सिंह ने पिछले वर्ष शासन स्तर शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत मरका में तालाब खुदाई के आठ कामों सहित अनौसा, बिल्हरका, मलेहरा निवादा, और बबेरू क्षेत्र के करहुली, कुरौली आदि गांवों में मनरेगा के अंतर्गत कराए गए कामों में ग्राम प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक ने भ्रष्टाचार किया है। यह भी आरोप लगाया था कि तत्कालीन उपायुक्त मनरेगा व सीडीओ इन्हें बचा रहे हैं।
शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच के आदेश दिए गए थे। इस पर संयुक्त विकास आयुक्त को जांच सौंपी गई थी। जांच में लगभग 20.30 लाख रुपये घोटाला पाया गया था। लगभग एक वर्ष से ज्यादा बीत गए और यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। इस पर अब वर्तमान जेडीसी प्रेम प्रकाश त्रिपाठी ने मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि जांच के बाद आरोपियों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा एक सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करें।
इनसेट...
जांच के बाद इन पर हुई थी कार्रवाई
बांदा। मनरेगा कार्यों में 1,71,871 रुपये गबन के दोषी बिल्हरका गांव के ग्राम विकास अधिकारी स्वतंत्र सिंह व प्रधान राजाबाई को पाया गया था। डीएम ने आदेश दिए थे कि यह राशि बैंक में जमा की जाए। साथ ही डीपीआरओ को पैसा न जमा कराने पर लताड़ भी लगाई थी। मरका गांव में आठ तालाबों की खुदाई में 6,31,331 रुपये के दुरुपयोग ग्राम विकास अधिकारी भवानी सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी अर्जुन सिंह, तकनीकी सहायक शारदा प्रसाद, विजय पाल व ग्राम प्रधान विनोद कुमार को दोषी पाया गया। उन्हें भी पैसा जमा करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा महुआ मलेहरा निवादा, करहुली, कुरौली, अनौसा आदि गांवों में भी प्रधान, तकनीकी सहायक व ग्राम विकास अधिकारी दोषी पाए गए थे।
जांच के बाद फाइल चली गई ठंडे बस्ते में
अब जेडीसी ने सीडीओ से मांगा ब्योरा
शिकायत पर शासन के आदेश से हुई थी जांच
अमर उजाला ब्यूरो