बांदा। मारपीट के एक मामले में सुलह-समझौते के लिए थाने में बुलाने के बाद भी सुनवाई न होने से टूटकर एक युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। मृतक के पिता ने पुलिस पर दूसरे पक्ष से प्रभावित होकर बेटे पर अनुचित दबाव बनाने और फिर फांसी पर लटका देने का आरोप लगाया है।
घटना तिंदवारी थाने की है। अमली कौर गांव में भगदरा डेरा के रहने वाले बबलू सिंह (37) के पिता रामआसरे सिंह के मुताबिक तीन दिन पहले बबलू की कटिया से बिजली का इस्तेमाल करने के आरोप पर पड़ोसी निषाद बिरादरी के लोगों से मारपीट हो गई थी। विवाद में डंडे और पत्थर चलने से बबलू के सिर में चोट आई थी। विरोधी पक्ष की भी दो बालिकाएं घायल हुईं थी। पुलिस ने दोनों पक्षों की एनसीआर दर्ज की लेकिन कार्रवाई नहीं की। कार्रवाई की मांग पर बबलू को सुलह कराने का भरोसा देकर शनिवार को थाने बुला लिया गया लेकिन दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक दूसरे पक्ष के लोग नहीं पहुंचे। तीन घंटे बेनतीजा गुजरने पर बबलू ने आपत्ति की तो डांट दिया गया।
थाने से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हालात से हताश होकर बबलू ने थाने के होमगार्ड रूम में जाकर छत में लगे पंखे के कुंडे से अंगौछा बांधकर गले में फंदा कस लिया। कुछ देर बाद उसे फंदे पर झूलता देखा तो पुलिस वालों में अफरा-तफरी मच गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
यह जानकारी घर तक पहुंचते ही घर वाले और ग्रामीण तिंदवारी थाने पहुंच गए। मृतक के पिता ने थाने में बेटे की हत्या किए जाने के आरोप लगाया। इससे थाने पर देर रात तक भारी भीड़ के बीच हंगामे जैसे हालात रहे। माहौल बिगड़ने के अंदेशे में कई थानों की पुलिस और पीएसी बुला ली गई। पुलिस अधीक्षक एस आनंद और अन्य पुलिस अधिकारी भी थाने पहुंच गए। थानेदार से लेकर अफसर तक इस मामले में बोलने से बचते नजर आए। काफी पूछने पर सीओ सदर कुलदीप गुप्ता ने कहा कि थाने में युवक के साथ मारपीट या उत्पीड़न की घटना नहीं हुई। फांसी क्यों लगाई, इसकी जांच की जा रही है।