बांदा। पंजाब आर्मरी लूटकांड अब पूरी तरह हाई प्रोफाइल केस बन चुका है। अपनी सरहद में लुटेरों को दबोचने में नाकाम रही स्थानीय पुलिस को अब विवेचना में भी मायूसी हाथ लग रही है। देश की चुनिंदा जांच एजेंसी एटीएस समेत दिल्ली और मुंबई पुलिस जांच में जुटी हैं। यूपी की एटीएस टीम भी लुटेरों का इतिहास और भूगोल खंगाल रही है। दो बार मुंबई हो आई बांदा पुलिस को कुछ खास हाथ नहीं लगा। जांच कर रही बड़ी एजेंसियों के आगे बांदा पुलिस की दाल नहीं गल रही।
डीजीपी के गृह जनपद के मुख्यालय में स्टेशन रोड जैसे व्यस्त इलाके में शस्त्र की दुकान में पड़ी डकैती और 44 कीमती असलहों और 4146 कारतूसों की लूट मामले में बांदा पुलिस की शुरू से ही किरकिरी हो रही है। लुटेरों ने शहर के मध्य से पहले बस चुराई और फिर डकैती डाली। पुलिस को न बस की भनक लगी न डकैती की। यहां तक कि यूपी और एमपी की सरहद से लुटेरे बेरोकटोक 1300 किलोमीटर दूर नासिक तक पहुंच गए। अब यहां की पुलिस लुटेरों को अपने कब्जे में लेने की भरपूर जुगत में जुटी हुई है। लेकिन नासिक पुलिस ने लुटेरों को 28 दिसंबर तक रिमांड पर ले रखा है। इसी के बाद यहां की पुलिस को अदालत के जरिए लुटेरे हाथ आ सकते हैं। बांदा पुलिस बी वारंट जारी करने में जुटी है।
उधर, एटीएस जहां लुटेरों का पूरा इतिहास और उनके जुड़े तारों की परतें खोलने की कोशिश कर रही है, वहीं बांदा पुलिस उन सूत्रधारों की तलाश में जुटी है जो नासिक के खूंखार डकैतों को बांदा तक लाने और लूट कराने में किसी भी तरह से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। मुंबई पुलिस भी बांदा पुलिस को कुछ भाव नहीं दे रही। यहां तक कि यहां से गई पुलिस टीमों को लुटेरों से मिलने का भरपूर मौका भी नहीं दिया। उनका फोटोग्राफ भी नहीं दिया। बमुश्किल चंद मिनट ही बांदा पुलिस लुटेरों से रूबरू हो पाई।
नासिक पुलिस द्वारा पकड़े गए तीन लुटेरों में दो खूंखार बताए जा रहे हैं। इनमें बदरुज्ज्मां उर्फ सुक्का और नागेश पर मुंबई में तीन दर्जन से ज्यादा मुकदमें हैं। पकड़े गए बदमाशों के 20 दिनों पूर्व तक के काल डिटेल एटीएस तलाश रही है। नासिक पुलिस इस पर भी जांच कर रही है कि लूटे गए असलहे और कारतूस आतंकवादियों को तो पहुंचाने की योजना नहीं थी ?