बांदा। दलित युवती की हत्या की कोशिश के मामले में अदालत ने दो अभियुक्तों को 10-10 साल की कैद और जुर्माना से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। शहर के धीरज नगर निवासी प्रेमचंद्र पुत्र शिवबालक ने कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 29 जनवरी 2014 को शाम उसकी बहन पिंकी स्कूटी से घर आ रही थी। रास्ते में गुड्डन चौबे, उमेश गौतम व संजीव तिवारी ने गाली देते हुए पिंकी को गोली मार दी।
तीनों ने उस पर चाकुओं से भी वार किए। वह लहूलुहान होकर वहीं गिर गई। साथ रही सहेली पुष्पा को भी गोली लगी। प्रेमचंद्र का कहना था कि शीलू तिवारी नामक युवक से पिंकी का शादी का विवाद था। इसी वजह से शीलू ने भाड़े के युवकों से गोली मरवाई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों पर धारा 307 व एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) डीपीएन सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने सात गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को अदालत ने चौबे थोक बबेरू निवासी गुड्डन चौबे और ओरन रोड बिसंडा निवासी उमेश गौतम को 10-10 वर्ष जेल व 10-10 हजार रुपये जुर्माना किया। एससी/एसटी एक्ट में भी इतनी ही सजा व जुर्माना किया गया।