बांदा। सभी लेखक प्रेमचंद की रचनात्मक संतानें हैं। हमने कई कहानियों में उनकी परंपरा से खुद को जोड़ा है। समय की कोख से रचनाएं जन्म लेती हैं। आज हमारा समय खरीद-फरोख्त का है। ये बातें प्रतिष्ठित पत्रिका पहल के संपादक और वरिष्ठ लेखक ज्ञान रंजन ने सम्मान समारोह में कही।
रविवार को बड़ोखर खुर्द स्थित प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह की बगिया में प्रतीक फाउंडेशन और देवेन्द्र खरे स्मृति शोध संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित समारोह में ज्ञानरंजन को ‘प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान’ से नवाजा गया। उन्हें 30 हजार रुपये का चेक, स्मृतिचिह्न, प्रशस्तिपत्र भेंट किया गया। देश के कई लेखक और साहित्यकार उपस्थित थे। ज्ञानरंजन ने कहा कि समय की कोख से हमारी रचनाएं जन्म लेती हैं। आज हमारा समय खरीद फरोख्त का है।
प्रसिद्ध आलोचक राजीव कुमार ने कहा कि 1960 के बाद ही हिंदी कहानी के मिजाज, तेवर और संरचना में आए बदलाव के प्रतिनिधित्व रूप ज्ञानरंजन हैं। प्रसिद्ध कहानीकार योगेन्द्र आहूजा ने कहा कि ज्ञानरंजन के पास गहरे सराेकारों से अर्जित भाषा है। जनमत पत्रिका के संपादक रामजी राय ने कहा कि ज्ञानरंजन की कहानियां धीरज, सादगी, मेहनत के मूल्यों को लेकर चलती हैं। समारोह का संचालन जनवादी लेखक संघ के सुधीर सिंह ने किया। प्रेमसिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।
समारोह संयोजक और प्रतीक फाउंडेशन संस्थापक मयंक खरे ने कथा सम्मान की 17 वर्ष की यात्रा का जिक्र किया। कहा कि ज्ञान रंजन का सम्मान बांदा शहर का सम्मान है। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक चंचल चौहान ने की।
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समारोह के दूसरे सत्र में देवेंद्रनाथ खरे स्मृति व्याख्यान हुए। वक्ताओं ने ‘संस्कृति का सवाल और साहित्य सृजन की चुनौतियां’ विषय पर विचार व्यक्त किए। आलोचक बृजेश यादव और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. प्रणय कृष्ण ने संबोधित किया। अध्यक्षता पत्रिका संपादक संजीव कुमार ने की। संचालन नीलाभ खरे ने किया।