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Banda News: ओपीडी में बुखार के मरीजों की होगी कोरोना जांच

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बांदा। कोरोना के दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी संक्रमण से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। अब ओपीडी में आने वाले बुखार के मरीजों की कोरोना जांच भी अनिवार्य कर दी गई है। इसके साथ ही गाइड लाइन का पालन करते हुए कोरोना मरीज की निगरानी की जा रही है। जांच का दायरा बढ़ाने के साथ ही कोविड वार्डों में बेड संख्या बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई।
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रानी दुर्गावती मेडिकल काॅलेज और जिला अस्पताल में ओपीडी में आने वालों मरीजों की पिछले एक सप्ताह में संख्या ज्यादा बढ़ी है। बानगी के तौर पर बुधवार को मेडिकल कॉलेज में 963 और जिला अस्पताल में 1054 मरीज ओपीडी में इलाज को पहुंचे। इनमें क्रमश: 237 और 279 मरीज सर्दी-खांसी और बुखार के थे।
यानी करीब 25 फीसदी बुखार और खांसी के मरीज रोजाना ओपीडी में इलाज को पहुंच रहे हैं। ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग शामिल रहे। वहीं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 752 लोगों की आरटीपीसीआर जांच कराई गई, लेकिन कोई पॉजिटिव नहीं मिला। न ही इन्फ्लूएंजा वायरस के लक्षण का मरीज सामने आया। हालांकि इन्फ्लूएंजा जांच की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। लक्षणयुक्त मरीज का नमूना लखनऊ भेजा जाएगा।
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कोविड-19 नोडल अधिकारी डाॅ. प्रसून खरे ने बताया कि संक्रमण से निपटने के बंदोबस्त पूरे हैं। अभी मेडिकल काॅलेज में 50 और जिला अस्पताल में 10 बेड आरक्षित किए गए हैं। जरूरत पड़ने पर मेडिकल काॅलेज में बेड संख्या 100 की जाएगी। फिलहाल यहां संक्रमण दर बेहद कमजोर है। यह 0.23 है। इसलिए गंभीर नहीं है। फिर भी संक्रमण से बचने के लिए लोगों को शासन की गाइड लाइन का पालन करना होगा। आपसी दूरी के मानक के साथ मास्क जरूर लगाएं।



जिले में कुल पांच ऑक्सीजन प्लांट



जिले में कुल पांच ऑक्सीजन प्लांट हैं। इनमें रानी दुर्गावती मेडिकल काॅलेज और जिला अस्पताल में दो-दो और नरैनी सीएचसी में एक ऑक्सीजन प्लांट है। मेडिकल काॅलेज में स्थापित 960 व 650 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट हैं। इसी तरह जिला अस्पताल में 550 व 650 एलपीएम क्षमता के प्लांट हैं।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी चालू हैं। पाइप लाइन के जरिए बेडों तक ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है। हालांकि असलियत कुछ और है। मेडिकल कॉलेज में 650 और जिला अस्पताल का 550 एलपीएम ऑक्सीजन प्लांट टेस्टिंग के बाद से बंद है। नरैनी सीएचसी प्लांट भी काफी समय से बंद है। नोडल अधिकारी का कहना है कि सभी प्लांट चालू हैं, जो मामूली खामियां होंगी उन्हें तुरंत दूर किया जाएगा। मॉकड्रिल से पहले तैयारी चौक-चौबंद कर ली जाएगी।






कंटेनमेंट जोन बनाकर की जाएगी निगरानी

नोडल अधिकारी डॉ. प्रसून खरे ने बताया कि संक्रमित मरीज के सामने आने पर कोविड-19 की रोकथाम के लिए जारी गाइड लाइन का पूरा पालन किया जाएगा। कंटेनमेंट जोन बनाकर मरीज की निगरानी की जाएगी। संक्रमित के घर को सैनिटाइज कराया जाएगा। उसे आसपास रहने वालों का ब्योरा जुटाया जाएगा। कोई बीमार मिलता है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी। पहले संक्रमित को घर पर ही आइसोलेट किया जाएगा। हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज के अलग वार्ड में भर्ती किया जाएगा। उसके संपर्क में आने वालों की जानकारी कर उनकी भी जांच कराई जाएगी। साथ ही रिपोर्ट आने तक उन्हें आइसोलेशन में रखकर निगरानी की जाएगी। सभी को मास्क लगाना अनिवार्य है।
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