बांदा। गांवों को साफ-स्वच्छ बनाने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। एक साल बीत जाने के बाद भी 23 मॉडल ग्राम पंचायतों में कचरा पृथक्करण केंद्र (आरआरसी) का निर्माण नहीं हो सका। वजह जमीन की अनुपलब्धता बताई जा रही है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2023-24 में जिले की 248 ग्राम पंचायतों को मॉडल बनाने के लिए चयनित किया गया था। नाली, खड़ंजा, सफाई, सफाईकर्मियों व कंप्यूटर ऑपरेटरों की तैनाती सहित कूड़ा निस्तारण का उचित प्रबंध करने सहित 16 बिंदु शामिल थे। इनमें मुख्य बिंदु कचरा पृथक्करण केंद्र का निर्माण भी शामिल है, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक 23 मॉडल ग्राम पंचायतों में कचरा पृथक्करण केंद्र निर्माण नहीं किया गया। परिणाम स्वरूप कचरे के निस्तारण का काम बंद है।
ग्राम पंचायत अछाह, अहर, आलमपुर, भुरेंडी, लामा, साथी, शाहपुर सानी, डडआमऊ, झंझरी, अंदौली, पन्नाह, अजीतपारा, बचई, बहेरी, नसेनी, नौगवां, नीबी, अमलीकौर, भिंडौरा, भुजरख।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में 198 गांव मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में विकसित होंगे। इसके लिए शासन ने 13 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है।
जमीन की अनुपलब्धता के कारण आरआरसी का निर्माण नहीं हो पा रहा है। जिलाधिकारी को इस बाबत अवगत कराया गया है।
अजय आनंद सरोज, जिला पंचायत राज अधिकारी बांदा
संदीप तिवारी