बांदा। लोकतंत्र रक्षक सेनानी के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर देने में लापरवाही का मामला शनिवार को लखनऊ के सपा विधायक ने विधानसभा में उठाया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
शहर के खांईपार निवासी लोकतंत्र रक्षक सेनानी (मीसा बंदी) जमीरउद्दीन सिद्दीकी का नौ जनवरी को निधन हो गया था। नियमानुसार उनके पार्थिव शरीर को स्थानीय प्रशासन व पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दी जानी थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने लापरवाही और चूक की। सलामी देने पुलिस टुकड़ी शाम को तब पहुंची, जब पार्थिव शरीर कब्र में दफनाया जा चुका था।
पुलिस ने कब्र पर ही सलामी की औपचारिकता निभा ली। लोकतंत्र सेनानी के छोटे भाई पूर्व मंत्री और कांग्रेस प्रांतीय अध्यक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कहना था कि उन्होंने निधन की सूचना सुबह समय से प्रशासन व पुलिस के आला अफसरों को दे दी थी।
अगले दिन अमर उजाला में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई। इसका संज्ञान लेते हुए लखनऊ से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने शनिवार को विधान सभा में नियम 51 के तहत विधान सभा अध्यक्ष को लिखित सूचना देते हुए इसे लोक महत्व का विषय बताते हुए सदन की कार्रवाई स्थगित कर इस मामले में चर्चा व कार्रवाई की मांग की। मेहरोत्रा ने एक अन्य लोकतंत्र सेनानी आनंद कृष्ण जायसवाल (सुल्तानपुर) को स्वास्थ्य सुविधा न मिलने पर निधन हो जाने का भी मुद्दा उठाया।