तिंदवारी। बेंदाघाट स्थित यमुना नदी का पुल एक माह में मरम्मत वाले हिस्से सहित दूसरे स्थान में भी क्षति ग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों ने एनएचएआई की रायबरेली शाखा के अभियंताओं को सूचना दी है। हालांकि अभी भारी वाहन की आवाजाही पर रोक नहीं लगाई गई है।
बांदा-टांडा नेशनल हाईवे में बेंदाघाट पर यमुना नदी में बने पुल के छठवें पिलर के पास 10 दिन पूर्व मरम्मत किये गए हिस्से में पड़ी प्लेट खिसकने से पुन: दरार आ गई है। शुक्रवार शाम ग्रामीणों ने ड्रम रख कर सुरक्षा की। इसके अलावा अन्य कई जगह पुल का हिस्सा क्षतिग्रस्त है। रायबरेली स्थित नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की शाखा को सूचना दी है। फ़िलहाल प्रशासन ने अभी भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक नहीं लगाई है।
23 फरवरी को पुल के छठवें पिलर के पास क्षतिग्रस्त हो गया था। भारी वाहनों का डायवर्जन कर नेशनल हाईवे ऑफ इंडिया की रायबरेली शाखा के अभियंताओं ने छतिग्रस्त हुए भाग को लोहे की मोटी चादर डाल कर दुरुस्त किया था। 20 मार्च को जिलाधिकारी के आदेश पर यातायात पुन: बहाल हुआ था। लेकिन 10 दिन में ही पुन: क्षतिग्रस्त हो गया।
एनएचएआई के अवर अभियंता आयुष्मान का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही से लोहे की पड़ी प्लेट खिसकी है। लखनऊ स्थित एनएचएआई के मुख्यालय सूचना दी गई है, एक्सपर्ट टीम पुल के क्षमता की जांच करेगी। क्षतिग्रस्त भाग के मरम्मत कार्य करने के अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
इनसेट
हर दिन दिन निकलते हैं लगभग एक हजार ओवरलोड ट्रक
यमुना नदी पुल का लोकार्पण 1980 में हुआ था। पुल बने 43 वर्षों से अधिक का समय हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक जब पुल बना तब 24 घंटे में मात्र 20 से 25 ट्रक ही निकलते थे, अब करीब एक हजार ओवरलोड ट्रक रोजाना इस पुल से गुजरते हैं। नेशनल हाईवे ऑफ अथॉरिटी के अभियंताओं ने हेडक्वार्टर लखनऊ को एक माह पहले पत्र के माध्यम से पुल की क्षमता और कंडम की स्थिति आदि की जांच के लिए पत्र लिखा था। लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसी बीच पुन: हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। (संवाद)