बांदा। मंडलायुक्त ने 10 जुलाई को जिले के बेसहारा गोवंशों को गोशालाओं में संरक्षित कराने के निर्देश दिए थे। 25 जुलाई तक की मोहलत देते हुए सभी बीडीओ और पशु चिकित्साधिकारियों को जिम्मेदारी दी थी। मोहलत का समय बीत गया, पर अभी तक ज्यादातर गोशालाएं सूनी हैं। इनमें कहीं जलभराव है तो कहीं अन्य अव्यवस्थाएं हावी हैं।
विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा समिति के जिलाध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने टीम के साथ बबेरू ब्लाॅक की कई ग्राम पंचायतों में गोशालाओं की स्थिति देखी तो दंग रह गए। ज्यादातर गोशालाएं सूनी व वीरान पड़ी हैं। ग्राम पंचायत बघेला में संचालित गोशाला में गोवंश के खाने वाली भूसे की चरही में चारपाई डाले केयरटेकर आराम करते मिला। कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान समय में मवेशियों को गोशाला में नहीं रखा जा रहा है। यहां सिर्फ एक टिनशेड की व्यवस्था है। यह स्थिति तब है जब मंडलायुक्त बालकृष्ण त्रिपाठी ने 25 जुलाई तक अन्ना मवेशियों को संरक्षित करने का आदेश दिया था।
जिले में संचालित किसी भी अस्थाई गोशाला में एक भी मवेशी संरक्षित नहीं किए गए हैं। शुक्रवार को जिलाधिकारी नगेंद्र प्रताप ने भी आदेशित किया था कि जिले में सभी गोशालाओं में अन्ना मवेशियों को संरक्षित किया जाए। बीडीओ और पशु चिकित्साधिकारी मवेशियों के संरक्षण में रुचि नहीं ले रहे हैं। गोशाला में कीचड़ ही कीचड़ दिख रहा है। उन्होंने तिंदवारी ब्लॉक की ग्राम पंचायत जमुवा में संचालित गोशाला भी देखी। यहां भी एक भी मवेशी संरक्षित नहीं मिले। पूरे गोशाला में पानी भरा हुआ है। ग्राम पंचायत सिंहपुर में संचालित अस्थाई गोशाला में भी एक भी मवेशी संरक्षित नहीं मिला। उन्होंने जिलाधिकारी से छुट्टा मवेशियों को तत्काल गोशालाओं में संरक्षित कराने की मांग की है।