मुकदमे की सुनवाई को लेकर कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को सुधा, उनके पिता गयाप्रसाद, मां पच्ची ने कोर्ट उपस्थित होकर शपथपत्र देते हुए बयान दर्ज कराए। गया प्रसाद ने बताया कि बेटी सुधा की शादी 1998 में दयाराम निवासी के साथ की थी। शादी के बाद दयाराम ने दहेज की मांग पूरी न होने पर बेटी को मारपीट कर घर से निकाल दिया था।
इसके बाद से बेटी मायके में रह रही है। कोर्ट को सुधा ने बताया कि पति ने उसकी बजाय अन्य महिला की मृत्यु दिखाकर फर्जी क्लेम के लिए दावा किया है। न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने मामले की सुनवाई के बाद आदेश में कहा कि दयाराम और उनके अधिवक्ता कई बार बुलाने के बाद भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए हैं।
कहा कि न्यायालय में जो साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं उनमें सुधा को मृतक और पंचायतनामा व पोस्टमार्टम भी किया जाना बताया गया है। इसका मुकदमा थाना पैलानी सदर बांदा में दर्ज है। पुलिस ने भी विवेचना कर आरोप पत्र चार मई 2014 को न्यायालय में दाखिल किया है। पीठासीन अधिकारी धर्मेंद्र कुमार पांडेय की कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिस महिला की मौत हो चुकी है, उसके लिए दावा किया है, लेकिन वह जीवित है। मामला गंभीर है। उन्होंने एसपी को मामले की जांचकर 15 दिन में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
दोषी मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई
न्यायाधीश ने कहा कि सुधा का कथन सत्य साबित होने पर मामले से संबंधित दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जज ने मामले में फैसला आने तक सुधा को सुरक्षा देने का एसपी को आदेश दिया है। मुकदमे की अगली सुनवाई के लिए मामले की सुनवाई दो नवंबर तारीख निर्धारित की गई है।