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बांदा : गर्मी से बिलबिलाए मरीजों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में डाला डेरा

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बांदा। 220 केवी विद्युत सबस्टेशन, तिदंवारी रोड के इंसुलेटर में फाल्ट से 12 घंटे तक मेडिकल कॉलेज की बिजली गुल रही। बिजली न आने से मेडिकल कॉलेज में भर्ती करीब 300 भर्ती मरीज और इतने ही तीमारदार गर्मी से बिलबिला उठे।
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चलने-फिरने में समर्थ मरीजों और तीमारदारों ने पूरी रात मेडिकल कॉलेज मैदान परिसर में बिताई। ऑपरेशन और फैक्चर के मरीज वार्डों में ही पंखा डुलाकर पूरी रात काटी। उधर, शहर के मोहल्लों में भी यही हाल रहा। लोगों के इनवर्टर भी जवाब दे गए। लोगों ने छतों और सड़क पर रात गुजारी।
शुक्रवार की रात करीब साढ़े आठ बजे इंसुलेटर में फाल्ट हुआ। रात भर बिजली विभाग की चार टीमें पेट्रोलिंग करतीं रहीं, लेकिन फाल्ट नहीं मिला। शनिवार को सुबह 8:45 बजे बिजली बहाल हुई।
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बिजली न रहने से मेडिकल कॉलेज के वार्डों में भर्ती तकरीबन 600 मरीज और तीमारदार गर्मी से परेशान रहे। मरीजों के साथ तीमारदारों ने मेडिकल कॉलेज परिसर के मैदान में डेरा डाला। उधर, कैंपस में भी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई नहीं कर पाए। छात्रों ने पूरी रात कमरे से बाहर टहल कर गुजारी।
सर्जरी वार्ड में भर्ती गुलशन पत्नी शमशुद्दीन ने बताया कि उसके पेट में गांठ का ऑपरेशन सोमवार को हुआ है। शुक्रवार की रात बिजली न आने से रात भर सो नहीं पाईं। आपरेशन की वजह से चलने में असमर्थ है। किसी तरह रात काटी।
हड्डी रोग वार्ड में भर्ती रामनारायण (बड़ी बड़ोखर) ने बताया कि नौ जुलाई को सड़क हादसे में उसका पैर टूट गया था। प्लास्टर चढ़ा है। बिजली न आने से पूरी रात गर्मी में वार्ड में पड़े रहे। पंखा डुलाकर किसी तरह गर्मी में रात काटी।
मुन्नी (पड़ुई) ने बताया कि 13 जुलाई को वह सिर में चोट आने की वजह से भर्ती हुई थी। रात में बिजली न होने की वजह से वार्ड के बाहर मैदान में डेरा डाले रही। उनके तीमारदार भी उनके साथ रहे। पूरी रात
संजना सिंह (हमीरपुर) ने बताया कि वह सोमवार को कान के ऑपरेशन की वजह से भर्ती है। शुक्रवार की पूरी रात बिजली न रहने से वह वार्ड में ही अकेली लेटी रही। जबकि वार्ड के अन्य मरीज व तीमारदार बाहर मैदान में चले गए। गर्मी से बुरा हाल रहा।
-मेडिकल कॉलेज की पूरी रात बिजली गुल रही, अपने स्तर से क्या किया?
फाल्ट की जानकारी मिलते ही 100 लीटर डीजल मंगाकर ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, ऑक्सीजन प्लांट और इमरजेंसी वार्ड में बिजली सप्लाई शुरू कराई। आधी रात के बाद 600 लीटर डीजल का और स्टाक रखा।
-फाल्ट की जानकारी मिलने पर किसे अवगत कराया?
मैंने मंडलायुक्त, डीएम और अपने ग्रुप (पीएसएमजी) में व्हाट्सएप से लिखित रूप से अवगत कराया। बिजली बहाल कराने के पूरे प्रयास किए। पूरी रात खुद लगा रहा और स्टाफ को भी लगाया।
-क्या मेडिकल कॉलेज के लिए अलग फीडर और स्पेशल लाइन नहीं दी गई है?
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 24 घंटे बिजली के लिए पूरा पैसा दिया है। मेडिकल कॉलेज फीडर से अन्य फीडर जोड़ दिए जाते हैं, जिससे यह फाल्ट हुआ।
-मेडिकल कॉलेज के बच्चों की पढ़ाई और मरीजों को असुविधा हुई। इस पर आप क्या कहेंगे?
यूपी आरएनएम बिजली इकाई प्रोजेक्ट मैनेजर के एस राजपूत को पूरी जानकारी दी है। उन्होंने बिजली कारपोरेशन के अधिकारियों से बात की है। कह रहे हैं कि जल्द समस्या का हल खोजेंगे।
डॉ. मुकेश यादव
प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कॉलेज, बांदा
वर्जन...
बिजली कॉरपोरेशन के इंजीनियरों से बात की है। मंगलवार को खुद मेडिकल कॉलेज को दी जाने वाली स्पेशल लाइन को देखूंगा। जल्द ही व्यवस्था में सुधार का प्रयास करेंगे। -केएस राजपूत, प्रोजेक्ट मैनेजर, यूपी आरएनएम बिजली इकाई।

Banda: The patients who were stunned by the heat camped in the medical college campus- फोटो : BANDA

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