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बांदा: खेत लबालब, मंडल के 13 बांधों में पानी नहीं, एक हफ्ते की बारिश में मात्र 5 फीसदी पानी बढ़ा

Sat, 30 Jul 2022 12:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
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बांदा जिले में एक हफ्ते से हो रही मानसूनी बारिश से चित्रकूटधाम मंडल के खेत लबालब भर गए, लेकिन यहां के सभी 13 बांधों में पानी नहीं है। बांधों में बमुश्किल पांच फीसदी पानी का ही इजाफा हुआ है। मंडल की तीनों मुख्य नदियों के जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई है।
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मानसूनी मौसम को डेढ़ माह बीत गया। अब अगस्त माह में संभावित वर्षा से बांधों और नदियों में उफान और बाढ़ की उम्मीद की जा रही है। भले ही अब बारिश लगातार हो रही है, लेकिन मंडल में खेती किसानी का काम पिछड़ गया है। बुजुर्ग किसानों का कहना है कि सावन माह में भी पुरवैया का चलना खेती-किसानी के लिए अच्छा नहीं रहा। धान की पैदावार 25 से 30 फीसदी घट गई। 15 जून से अब तक चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में औसत बारिश 197 मिलीमीटर हुई। जबकि चारों जिलों में मानसूनी वर्षा का औसत 817 मिलीमीटर है।

चित्रकूटधाम मंडल में अब तक हुई बारिश
बांदा - 230.50 मिमी (औसत वर्षा 830 मिमी)
चित्रकूट - 170 मिमी (औसत वर्षा 830 मिमी)
महोबा - 257 मिमी (औसत वर्षा 805 मिमी)
हमीरपुर - 133 मिमी (औसत वर्षा 805 मिमी)
चित्रकूटधाम मंडल की तीन प्रमुख नदियों का मौजूदा जलस्तर
केन नदी (बांदा) : 95.23 मीटर (खतरे का निशान 104 मीटर)
यमुना नदी (चिल्ला घाट) : 93.77 मीटर (खतरे का निशान 100 मीटर)
बेतवा नदी (हमीरपुर) : 96.72 मीटर (खतरे का निशान 104.546 मीटर)
यमुना नदी (हमीरपुर) : 97.26 मीटर (खतरे का निशान 103.632 मीटर)
नोट - बांदा में केन नदी खतरे के निशान से लगभग नौ मीटर और चिल्ला घाट में यमुना नदी खतरे के निशान से लगभग छह मीटर नीचे है। हमीरपुर में बेतवा नदी करीब सात मीटर और यमुना नदी छह मीटर नीचे है।
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मंडल के बांधों में जलस्तर (मीटर में) और वर्षा (मिलीमीटर में)-


बांध जलस्तर वर्षा
गंगऊ 57 337
रनगवां 05 194
बरियारपुर 51 120
ओहन (चित्रकूट) 06 166
बरुआ (चित्रकूट) 03 135
गुंता (चित्रकूट) 19 33
रसिन (चित्रकूट) 23 175
अर्जुन (महोबा) 39 110
चंद्रावल (महोबा) 49 137
कबरई (महोबा) 81 235
मझगवां (महोबा) 05 128
उर्मिल (महोबा) 01 149
मौदहा (हमीरपुर) 29 200

गंगऊ से 11,990 क्यूसेक पानी केन नदी में छलका
मध्य प्रदेश की घाटियों में हुई बारिश से गंगऊ और बरियारपुर बांधों के जलस्तर में इजाफा हुआ है। ये डेड स्टोर की स्थिति में थे। हालांकि बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। शुक्रवार को गंगऊ वियर की क्रस्टवाल के ऊपर से 11990 क्यूसेक पानी उफनाकर केन नदी में गिरता रहा। इसी तरह बरियारपुर में क्रस्टवाल से 7150 क्यूसेक पानी केन नदी में डिस्चार्ज हो रहा है। सिंचाई विभाग ने मुख्य केन नहर चालू कर दी है। साथ ही अतर्रा और बांदा ब्रांचों में भी पानी छोड़ दिया है। मुख्य केन नहर में 2300 क्यूसेक, अतर्रा ब्रांच में 1350 क्यूसेक और बांदा ब्रांच में 433 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

अलर्ट के बावजूद नहीं खाली करते गांव
केन नदी किनारे छोटे-छोटे मजरे छनिहा डेरा, सिमरा डेरा, शिवपाल डेरा, भरथा डेरा, मुरलिया डेरा सहित कुटी डेरा, बरेहटा के लोगों की जीविका नदी से जुड़ी है। यहां सबसे पहले सिमरा डेरा में बाढ़ का पानी घुसता है। लेकिन अलर्ट के बाद भी यह लोग जीविका के चलते अपना घर-बार नहीं छोड़ते। प्रतिदिन नाव से राशन सामग्री और सब्जी इत्यादि लाते हैं।

लेखपाल कृष्णचंद्र ने बताया कि केन नदी खतरे के निशान से बहुत नीचे है। चुनबाद सिंह, इंद्रपाल शुक्ला, शिवशंकर तिवारी ने बताया कि केन नदी का पानी पंचायत घर के नीचे नहीं रहने तक बाढ़ का ज्यादा खतरा नहीं होता। सबसे पहले सेमरा डेरा में बाढ़ का पानी घुसता है। प्रतिदिन यहां से लोग नाव से भूसा चारा भरकर लाते हैं। क्योंकि कस्बे के एक तिहाई किसानों की जमीन केन नदी के उस पार है। जिनका प्रतिदिन नाव से आवागमन होता है। नाव के माध्यम से ही राशन सामग्री सब्जी आदि लाना ले जाना प्रतिदिन का काम है।
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