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बांदा : बाढ़ के बीच राशन बिजली पानी व इलाज का संकट

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31 बीएनडीपी 21- खेरा गांव में बाढ़ से गिरा शिव बालक पासी का कच्चा मकान - फोटो : BANDA
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बांदा। केन और यमुना की बाढ़ की चपेट में आए जिले के 46 गांवों से बाढ़ का पानी घटने लगा है। करीब 60 से 65 हजार आबादी वाले इन गांवों में जन जीवन पूरी तरह सामान्य होने में दो हफ्ते से अधिक का समय लग जाएगा। सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, राशन, फसलें सब बाढ़ की चपेट आने से प्रभावित हुई हैं।
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बाढ़ का पानी कम होने के बाद गांवों में लोगों की दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। बिजली के खंभे और तार टूट जाने से बिजली सप्लाई बंद है। इस वजह से कई गांवों के लोग परेशान हैं। बिजली नहीं आने से लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। कुएं और हैंडपंपों से गंदा पानी आ रहा है।
इससे बीमार होने की आशंका बढ़ गई है। इन क्षेत्रों में 12 से अधिक ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं। 20 से अधिक खंभे पानी में डूबे हैं। हालांकि प्रशासन घर-घर राशन वितरण करा रहा है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं हैं।
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हालांकि डीएम अनुराग पटेल के सुपर विजन में एसडीएम और तहसीलदारों ने राजस्व, स्वास्थ्य विभाग, बिजली कंपनी, जिला आपूर्ति विभाग के लोगों के साथ समन्वय बनाकर गांव-गांव लोगों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
पशुओं के टीकाकरण में आई तेजी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा विभाग की 13 टीमें, पशु चिकित्सा विभाग की 12 टीमें लगी हुई हैं। तहसील बबेरू में चिकित्सा विभाग की 10 टीमें एवं पशु चिकित्सा विभाग की दो टीमें बाढ़ से प्रभावित गांवों में जाकर इलाज व टीकाकरण कर रही हैं। पैलानी में 1390 एवं तहसील बबेरू में 900 पशुओं का टीकाकरण किया गया।
जलभराव और कीचड़ से राहत कार्यों में बाधा
बबेरू/कमासिन/खप्टिहाकलां। केन व यमुना नदी का जलस्तर घटने के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए है। हालांकि अभी भी कई मार्गों में जलभराव व कीचड़ होने से बचाव व राहत कार्यों में बाधा आ रही है। राहत व स्वास्थ्य टीमें पीड़ितों तक नही पहुंच पा रही हैं। चिकित्साधीक्षक ऋषिकेश नेतृत्व में डाक्टरों की एक टीम बबेरू के बाढ़ प्रभावित गांव मझींवा, मरका, चक्की डेरा, उसरा, हरिका डेरा, पहुंची।
कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया। बीमारों को दवाएं वितरित कीं। दीपक, सूरज, उदयवीर, प्रधान प्रतिनिधि मुलायम यादव ने बताया कि बाढ़ उतरने के बाद मलबा सड़ रहा है। इससे बीमारियां फैल रही हैं। कमासिन के खेरा गांव में राजस्व व स्वास्थ्य टीम ने निरीक्षण किया। गिरे मकानों की सूची बनाई। स्वास्थ्य टीम ने मरीजों को जांच कर दवाएं दी। औदहा गांव में मार्ग अवरुद्ध होने से टीम नहीं पहुंच सकीं।
प्रधान शिव शंकर ने बताया कि गांव में 12 से अधिक मकान गिर गए। 1500 बीघे में बोई गई ज्वार, बाजरा, मूंग की फसल नष्ट हो गई। खप्टिहाकलां के शंकर पुरवा, बरेहटा, शिवराम का पुरवा, सिमरन छेरा, छनिया डेरा, करिंदा डेरा, शिवपाल का डेरा, नरी, पंडितन डेरा आदि केन के उतरने के बाद बाढ़ का पानी तमाम मलबा छोड़ गया है, जिससे दुर्गंध फैल रही है। सफाई का काम धीमी गति से चल रहा है।
स्वास्थ्य टीमें भी मलबे के कारण गांव नहीं पहुंच पा रही हैं। पैलानी के गुरगवां, अदरी, बसधरी, झझरी पुरवा, ललौली, पडेरी, शबादा, इच्छवर, चंदवारा, महावरा, तगड़ा डेरा, कंघी डेरा में स्वास्थ्य टीमों ने पहुंचकर मरीजों को दवाएं बांटीं। इधर, सदर तहसील के कनवारा, चट-चटगन, ब्रम्हाडेरा में राजस्व टीम ने नुकसान का जायजा लिया। बताया कि केन नदी के बाढ़ के पानी से यहां सर्वाधिक फसलों को क्षति पहुंची है। पैलानी के पड़वन डेरा के ग्रामीणों एसडीएम से शिकायत की है कि लेखवाल बाढ़ राहत सामग्री नहीं दे रहा है।

31बीएनडीपी 22 खप्टिहा कलां क्षेत्र में केन का घटता पानी।- फोटो : BANDA

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