बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के परिवहन निगम को 100 से अधिक बसों की जरूरत है, लेकिन सिर्फ आठ नई बसें मिली हैं। इन्हें दिल्ली और लखनऊ मार्ग पर लगाया गया है। ऐसे में यात्रियों को कंडम बसों में जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ रही है। यहां पर 60 से अधिक बसें खराब पड़ी हैं।
बेडे़ में 394 बसें हैं। इनमें से 50 फीसदी बसें 12 लाख किलोमीटर या 12 वर्ष का मानक पूरा कर चुकी हैं। कई बसें ऐसी भी हैं जो 20 लाख किलोमीटर चलने के बाद भी सड़क पर दौड़ रही हैं। किसी-किसी में शीशे भी नहीं हैं। कब कहां खड़ी हो जाएं, पता नहीं। कई बसें तो धक्का देने के बाद स्टार्ट होती हैं। बसों के शोर के कारण यात्री एक दूसरे की बात भी नहीं सुन पाते हैं। जर्जर बसों को ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया गया है।
- शासन ने 1500 बसों की खरीद की है, लेकिन अभी सिर्फ 150 बसों को हरी झंडी दी गई है। आठ बसें शासन से मिली हैं। अभी और गाड़ियां मिलेंगी। जर्जर बसों की मरम्मत करा दी गई है। - राजीव कुमार शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक