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बांदा : तुर्रा में रेल पटरी उखाड़ी, 21 कोड़ों की सजा मिली, आजादी के लड़ाई में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राजाराम के योगदान को यादकर गर्व करते हैं बुंदेली

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10 फोटो 15 स्वतंत्रता सेनानी पं. राजाराम रूपोलिहा, फाइल फोटो - फोटो : BANDA
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अतर्रा। आजादी की लड़ाई में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राजाराम रूपोलिहा के योगदान को यादकर बुंदेली आज भी गर्व करते हैं। रेल पटरी उखाड़ने के जुर्म में उन्हें जेल और 21 कोड़ों की सजा दी गई थी।
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कस्बे के बदौसा रोड आंबेडकर नगर निवासी पौत्र देशबंधु रूपौलिहा ने बताया कि पांच नवंबर 1931 को महात्मा गांधी ने अतर्रा के टापू (चौक बाजार) में भाषण दिया और तिरंगा फहराया था। यह जगह अब गांधी चौक के नाम से जानी जाती है। हर वर्ष राजाराम रूपोलिहा 15 अगस्त और 26 जनवरी यहां पर झंडा फहराते थे। महात्मा गांधी दो दिन पंडित जी के घर ठहरे थे। राजाराम ने 1941 में सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। इस पर अंग्रेजी शासन ने एक साल के कारागार और 10 रुपये जुर्माना लगाया था।
उन्होंने मलाका जेल (वर्तमान में रानी अस्पताल) प्रयागराज में सजा की अवधि बिताई थी। 1942 में राजाराम अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी के साथ महासमिति की बैठक में शामिल होने पंजाब मेल ट्रेन से मुंबई गए थे। वहां महासमिति की बैठक को भंग करने के लिए अंग्रेजी पुलिस व सीबीसीआईडी ने धर्मशाला में छापा मारा था। 21 अगस्त 1942 को तुर्रा में रेल पटरी उखाड़ने के जुर्म में 26 अगस्त को अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद ब्रिटिश कोर्ट ने 21 कोड़ों की सजा सुनाई थी। 1949 में वह अतर्रा नगर पंचायत में चेयरमैन बने और गरीबों का टैक्स माफ किया। देश आजाद होने के बाद अतर्रा नगर पंचायत के प्रथम चेयरमैन भी बने।
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इंदिरा गांधी ने किया था सम्मानित
- 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजाराम रूपोलिहा को दिल्ली के लाल किले में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। यह ताम्रपत्र आज भी रखा है।
- 1950 में जमींदारी उन्मूलन कोष के संग्रह में सहायता प्रदान करने पर तत्कालीन बांदा कलक्टर शिवराम सिंह ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।
- 5 फरवरी 1951 को डीआईजी कानपुर एमएस माथुर ने अपराधीकरण को मिटाने व पुलिस की सहायता पर पुरस्कृत किया था।
चंद्रशेखर आजाद भी इनके घर रुके थे
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजाराम रूपोलिहा के अतर्रा स्थित घर में चंद्रशेखर आजाद ब्रिटिश पुलिस से बचने के लिए चार दिन ठहरे थे।
13 मई 1982 को हुआ निधन
देशबंधु ने बताया कि बाबा राजाराम रूपोलिहा की मृत्यु 13 मई 1982 को उनके आवास पर ही हो गई थी। एक पुत्र जगत सेवक रूपोलिहा थे। जिनका निधन भी कुछ वर्षों पूर्व हो गया था। देशबंधु रूपोलिहा नरैनी ब्लॉक के बसरेही गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज प्रधानाध्यापक के तौर पर कार्यरत हैं। इनके दो पुत्र व एक पुत्री है।
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