अतर्रा (बांदा)। देहरादून के डोईवाला में मां-पत्नी और तीन बेटियों को मौत के घाट उतारने के आरोपी महेश की तंत्र विद्याओं से मोहल्ले के लोग भी परेशान थे। महेश परिवार को लेकर छह साल पूर्व उत्तराखंड चला गया। बड़े भाई उमेश की मदद से जमीन खरीदकर वहीं बस गया।
सोमवार को भागवत नगर के बाशिंदों ने बताया महेश मूलरूप से हमीरपुर जिले के रीवन करइहा गांव का रहने वाला है। करीब 30 साल पहले वह परिवार समेत यहां आकर बस गया। उसकी शादी 18 साल पहले रामपुर (पन्ना, एमपी) गांव निवासी नीतू देवी के साथ हुई थी।
महेश का व्यवहार अच्छा नहीं था। तांत्रिक क्रियाओं के चलते लोग उससे परेशान थे। बताया गया कि तीन माह पूर्व महेश यहां आया था। करीब एक माह रुकने के बाद चला गया। तब से उसका कोई अता पता नहीं है।
बताया जाता है कि अतर्रा कस्बे में महेश की मौसी रहती थी। मौसी के कहने पर महेश के पिता दिनेश तिवारी हमीरपुर से वर्ष 1990 में आए थे। उनके चार बेटों में उमेश, महेश, रमेश और नरेश हैं। दो बेटियां श्यामभवानी और रामभवानी हैं, जो कि विवाहित हैं।
बताया कि करीब 10 साल पहले दिनेश की मौत हो गई थी। करीब छह साल से बदौसा रोड स्थित उनके मकान में ताला बंद है। उमेश और महेश उत्तराखंड में रहते हैं। रमेश मदौहा और सबसे छोटे नरेश के अमेरिका में रहने की जानकारी है। करीब चार-पांच साल से परिवार के किसी भी सदस्य से बात नहीं हुई। ये लोग क्या करते हैं। इसकी सटीक जानकारी नहीं है।
वर्ष 2018 में दी थी हत्या की सूचना
स्थानीय लोगों के मुताबिक, वर्ष 2018 में महेश का उसके घर के अंदर विवाद हुआ था। अफवाह है कि उसने युवक की हत्या कर दी थी। एक पड़ोसी ने पुलिस को हत्या होने की सूचना देते हुए बुलाया भी था। पुलिसकर्मियों के आने पर महेश ने भाइयों के विवाद में शोर मचने की बात कहकर लौटा दिया था।