बांदा। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ दो यूनिट रक्त बचा है। ब्लड बैंक प्रभारी का कहना है कि प्रेरित करने के बाद भी रक्तदान के लिए कोई आगे नहीं आ रहा।
जिला अस्पताल परिसर में संचालित ब्लड बैंक में सात बड़े फ्रीजर हैं। इसकी क्षमता 300 यूनिट रक्त रखने की है। ब्लड बैंक की स्थापना करीब 17 साल पहले हुई थी, पर यहां आज तक एक मुश्त 100 यूनिट रक्त कभी इकट्ठा नहीं हुआ। 14 जून को शिविर में करीब 30 यूनिट ब्लड इकट्ठा हुआ था, लेकिन मांग के मुताबिक ये एक हफ्ते भी नहीं चल सका। मौजूदा समय में अदलाबदली से ही लोगों के रक्त की जरूरत पूरी हो रही है। कैंसर, थैलेसीमिया व डायलिसिस मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर मुफ्त खून मुहैया कराने के निर्देश हैं, लेकिन इन्हें भी समय पर खून मयस्सर नहीं हो पाता।
ब्लड बैंक में एबी व ए-पॉजिटिव व निगेटिव, बी-निगेटिव, ओ-निगेटिव ग्रुप का रक्त नहीं है। सबसे ज्यादा मांग भी इन्हीं ग्रुप की रहती है। ब्लड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक रोजाना 6-7 यूनिट रक्त की खपत है। ऐसे में इसकी पूर्ति कर पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
वर्जन
ब्लड बैंक में मात्र दो यूनिट रक्त बचा है। पंजीकरण कराने के बाद भी बहुत से रक्तदान के लिए लोग नहीं आते हैं। बहुत जरूरी होने पर ब्लड डोनर को बुलाया जाता है।
- डॉ. विनीत सचान
रक्तकोष प्रभारी, बांदा।