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ढाई गुना से अधिक खाद वितरित, फिर भी मारामारी

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बांदा। अक्तूबर माह में चित्रकूटधाम मंडल में डीएपी के वितरण का लक्ष्य 6786 मीट्रिक टन था, इसके सापेक्ष 16626 मीट्रिक टन वितरण हो चुका है। इसके बाद भी डीएपी के लिए केंद्रों पर उमड़ रही किसानों की भीड़ से खाद की कालाबाजारी की आशंका है। फिलहाल डीएम दीपा रंजन ने दो जंबो रैक डीएपी की उपलब्धता के लिए शासन को पत्र लिखा है।
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चित्रकूटधाम मंडल में रबी की बुवाई का पीक समय है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 15 नवंबर तक रबी की बुआई हो जानी चाहिए। किसानों के खेत बुवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल पा रही है। किसान एक-एक बोरी खाद के लिए क्रय केंद्रों में कई-कई दिनों से डेरा डाले हैं। खाद न मिलने से उनकी बुवाई पिछड़ रही है।
उधर, अधिकारी दावा कर रहे हैं कि मंडल में लक्ष्य के सापेक्ष ढाई गुना अधिक खाद का वितरण किया जा चुका है। अक्तूबर में डीएपी का लक्ष्य 6,786 मीट्रिक टन है। इसके सापेक्ष 16,626 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है। जो 245 फीसदी है।
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विभाग की मान लें तो फिर खाद के लिए किसान क्यों परेशान हैं और वितरित खाद कहां चली गई। इससे निजी खाद दुकानदारों द्वारा सहकारी समितियों से डीएपी की कालाबाजारी होने की आशंका जताई जा रही है।
चित्रकूट में लक्ष्य के सापेक्ष 3539 मीट्रिक टन डीएपी का अधिक वितरण किया गया है, जो 4756 फीसदी है। महोबा में लक्ष्य के सापेक्ष 2421 मीट्रिक टन डीएपी वितरित की गई। जो 276 फीसदी है। हमीरपुर में लक्ष्य के सापेक्ष 2323 मीट्रिक टन खाद वितरित की गई। जो 174 फीसदी है। बांदा में लक्ष्य के सापेक्ष 1557 मीट्रिक टन डीएपी अधिक वितरित की गई है। 170 फीसदी है।
उप आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता चित्रकूटधाम मंडल बीरेंद्र बाबू का कहना है कि बांदा जनपद में सहकारिता सहित अन्य विभागों के 74, महोबा में 77, हमीरपुर में 52, चित्रकूट में 45 क्रय केंद्रों में डीएपी की बिक्री की जा रही है। खाद की कमी को देखते हुए आयुक्त व जिलाधिकारी दीपा रजंन ने दो जंबो रैक डीएपी के लिए शासन को लिखा है। जल्द मंडल को और खाद उपलब्ध होगी।
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