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कर्ज अदायगी के तनाव में प्रवासी मजदूर ने जान दी

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बांदा। बैंक के कर्ज से परेशान सिक्योरिटी गार्ड ने जहर खाकर जान दे दी। बेटे ने बताया कि वर्ष 2013 में केसीसी से तीन लाख रुपये कर्ज लिया था, जो बढ़कर पांच लाख हो गया। बैंक से ब्याजमाफी योजना का पत्र आया था। इसमें कर्ज अदा करने की बात कही गई थी। इसी से क्षुब्ध होकर जान दे दी।
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बबेरू कोतवाली क्षेत्र के अंडौली गांव में विदिकेश (47) ने शनिवार को दोपहर घर में जहर खा लिया। पत्नी मिथलेश और छोटे पुत्र रविकांत ने जहर की गोलियां छीनने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए। हालत बिगड़ने पर पर बबेरू सीएचसी ले गए। वहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
बेटे शशिकांत ने बताया कि पिता विदिकेश अहमदाबाद स्थित कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। दशहरा पर घर आए थे। बताया कि सितंबर में बैंक से दो नोटिस आए थे। इसमें ब्याज माफ कर मूलधन अदायगी को कहा जा रहा था।
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पिता ने उससे कुछ रुपये भरने के लिए कहा, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे। दो साल पहले बहन सुधा की शादी करने पर कर्ज हो गया था। इसी वजह से बैंक का कर्ज अदा नहीं हो पा रहा था। पिता के नाम 25 बीघा खेती है। बैंक शाखा प्रबंधक राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि कर्ज अदायगी का नोटिस नहीं बल्कि ब्याजमाफी योजना की जानकारी दी गई थी।
पहले भी की थी जहर खाने की कोशिश
बेटे शशिकांत ने बताई पिता विदिकेश पहले भी कई बार जहर खाने की कोशिश कर चुके थे। बताया कि घर में जरा सा विवाद होने पर बाजार से जहर की गोलियां खरीद लाते और फिर खाने की कोशिश करते थे। पूरा परिवार मिलकर बचाता था। वह ऐसा तीन-चार बार कर चुके थे।
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