बांदा। राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किसान की खेत में दो बार बोरिंग फेल होने से सदमे के कारण मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि बैंक का लगभग तीन लाख रुपये कर्ज है। जैविक खेती के जरिये परिवार का गुजर बसर कर रहे थे।
नरैनी तहसील और गिरवां थाना क्षेत्र के खानपुर गांव निवासी राकेश सिंह (55) ने रासायनिक खाद को दरकिनार कर गोमूत्र, गोबर, जीवामृत व घनजीवामृत आदि खाद से खेती को अपनाया। इसी के चलते 17 फरवरी 2018 को कानपुर के चंद्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी में आयोजित सेमिनार में उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया था।
वह शनिवार की शाम खेत गए थे। वहां उनकी तबियत बिगड़ गई और बेहोश हो गए। आसपास मौजूद किसानों ने घरवालों को सूचना दी और जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। भाई विनोद सिंह ने बताया कि राकेश के नाम 10 बीघा जमीन है। खेतीबाड़ी से गुजर बसर होता है। खेत में बोरिंग कराई थी। एक सप्ताह के अंदर दो बोरिंग फेल हो जाने और इस पर लगभग 50 हजार रुपये खर्च होने से वह तनाव में थे। इसी सदमे में सीने में दर्द हुआ और जान चली गई। भाई ने बताया कि आर्यावर्त बैंक खत्री पहाड़ शाखा से इसी वर्ष अप्रैल में क्रेडिट कार्ड से तीन लाख रुपये कर्ज लिया था। जैविक खेती में पिपरमेंट और पामारोजा की खेती करते थे। इसमें भी कोई फायदा नहीं हुआ। उसके दो पुत्र हैं।