बांदा। मिड-डे मील योजना में बजट की कमी का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। करीब आठ माह से फल के लिए बजट नहीं मिला। शिक्षक अपनी जेब या फिर उधारी के सहारे बच्चों को मेन्यू के मुताबिक फल बांट रहे हैं। आलम यह है कि जिले भर के लगभग 1725 स्कूलों के शिक्षक करीब एक करोड़ रुपये के कर्जदार हो गए हैं।
जिले में 1725 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें लगभग सवा दो लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसके अलावा एडेड स्कूलों के साथ माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित राजकीय व एडेड विद्यालय हैं। पहली कक्षा से लेकर 8वीं तक सभी स्कूलों में मिड-डे मील योजना लागू है। खाद्यान्न की व्यवस्था तो मुफ्त हो जाती है, लेकिन फल और दूध खरीदना पड़ता है। शासन द्वारा जारी कंपोजिट बजट से दूध का भुगतान तो अगले माह दिसंबर तक का अदा कर दिया गया, लेकिन फलों के वितरण का शासन से अब तक कोई पैसा नहीं मिला।
बताया गया है कि लगभग आठ माह से स्कूलों में बच्चों को बांटे जाने वाले फल का अब तक धेला नहीं मिला। कुछ शिक्षक नकद फल खरीदकर बांट रहे हैं तो बड़ी संख्या में शिक्षक फल विक्रेताओं के कर्जदार हो गए हैं। उन्हें अदायगी के लिए शासन के बजट का इंतजार है। हरेक शिक्षक पर लगभग 50 हजार रुपये फल का कर्ज है।
स्कूलों में बांटे गए फल के लिए आठ माह से बजट नहीं मिला है। लगभग एक करोड़ रुपये की जरूरत है। इसके भुगतान के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। बजट आते ही भुगतान कर दिया जाएगा। हाल ही में जो बजट मिला वह ठिकाने लग चुका। उससे रसोइयों, अन्य दुकानदारों और दूध के बकाए की अदायगी कर दी गई।-भाष्कर कुमार, जिला समन्वयक, मिड-डे मील, बांदा।