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बांदा : मरका नाव हादसे पर सरकार दे अपना वक्तव्य

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बांदा। मरका घाट पर पिछले माह यमुना नदी में नाव पलटने से डूबकर हुई मौतों का मामला बुधवार को विधानसभा में उठा। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले में प्रदेश सरकार को सदन में वक्तव्य देने का निर्देश दिया।
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11 अगस्त की दोपहर मरका घाट पर यात्रियों से खचाखच भरी नाव उफनाती यमुना नदी में पलट गई थी। इसमें 15 लोगों की डूबकर मौत हो गई थी, जबकि 17 लोग बच निकले। बुधवार को नाव हादसे की गूंज प्रदेश की विधानसभा में भी उठी। सपा विधायक विशंभर सिंह यादव ने नियम-301 के तहत विधानसभा अध्यक्ष को दी सूचना (नोटिस) में इसे लोक महत्व का विषय बताते हुए कहा कि नाव पर सवार 50 में से 40 लोग डूबकर मर गए।
इसमें महिलाएं और बच्चे भी थे। विधायक ने कहा कि यमुना नदी में मरका घाट पर बन रहे पुल में पांच साल से कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। पुल बन गया होता तो इतने लोगों की जान न गई होती।
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विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि इसे संज्ञान में लेते हुए सरकार पुल निर्माण शीघ्र कराए। विधायक ने बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी इस सूचना का संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार को इस पर अपना वक्तव्य सदन में देने को कहा है।
मरका घाट पर यमुना नदी में पुल निर्माण में लेटलतीफी जानलेवा साबित होने के साथ ही प्रदेश सरकार के खजाने को भी चपत लगा रही है। वर्ष 2010-11 में बसपा सरकार में स्वीकृत हुए पुल का शिलान्यास तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने किया था।
तब इसकी लागत 56 करोड़ 45 लाख 76 हजार रुपये थी। समय से निर्माण पूरा न होने पर अब लागत 87 करोड़ 80 लाख 92 हजार रुपये हो गई है। सरकार पर एक मुश्त 31 करोड़ 35 लाख 16 हजार रुपये का बोझ बढ़ गया है।
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