फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Banda Boat Accident: यमुना की लहरों में टकटकी लगाए अपनों को खोजती रहीं निगाहें, रक्षाबंधन दे गया दर्द

Sat, 13 Aug 2022 12:33 AM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
विज्ञापन
यमुना नदी में लापता हो गए लोगों के बिलखते परिजन। - फोटो : BANDA
विज्ञापन
बांदा जिले में नाव पलटने के बाद लापता हो गए लोगों की तलाश में उनके परिजन यमुना नदी की लहरों में टकटकी लगाए रहे। रक्षाबंधन को हुई इस घटना ने बड़ा दर्द दे दिया। किसी भाई ने बहन खोई तो बहन ने भाई खो दिया। मां-बेटा, दंपती आदि रिश्ते भी यमुना नदी की जलधारा में डूब गए।
विज्ञापन


फतेहपुर जिले के कठुआ गांव निवासी पिंटू ने बताया कि मर्का थाना क्षेत्र के भुरियानी गांव से बहन माया अपने दो वर्षीय पुत्र महेंद्र को लेकर उसे राखी बांधने आ रही थी। नाव पलटने के बाद दोनों लापता हो गए। भाई के साथ माया के देवर भोला भी घाट किनारे डटे रहे।

मरझा गांव की पुष्पा ने बताया कि भानूपुर गांव का भाई जयचंद्र राखी बंधवाकर वापस जा रहा था। यमुना की लहरों में बह गया। वह यह घटना जिंदगीभर नहीं भूल सकेगी। इसी तरह मरका गांव निवासी रामप्रकाश ने बताया कि चाचा बाबू और चाची शीतल 8 वर्षीय बेटे को लेकर असोथर गांव रक्षाबंधन मनाने जा रहे थे। तीनों नदी में गुम हो गए। दो दिन से नदी किनारे बैठकर उनके मिलने की आस में टकटकी लगाए हैं।
विज्ञापन

‘बचाओ-बचाओ’ की चीख के अलावा कुछ नहीं सुनाई दिया
यमुना नदी में नाव पलटने के बाद बड़ा खौफनाक मंजर नजर आया। ‘बचाओ-बचाओ’ की चीखों के अलावा कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। 20-25 लोग तेज बहाव में बहते चले जा रहे थे। इनमें 5-6 ऐसी महिलाएं भी थीं जो अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में समेटे बहते हुए जिंदगी की गुहार लगाती रहीं। लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका।

नदी से सुरक्षित निकले प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां की घटना। यह दर्दनाक मंजर बचकर निकले लोगों ने बयां किया। मर्का गांव निवासी दुर्गेश ने बताया कि पतवार टूटने से घटना हुई। उसके साथ भांजा रामप्रतीत भी नदी की जलधारा में बहने लगा। उसने तैरकर अपने भांजे को कपड़ों के सहारे पकड़ा और सुरक्षित किनारे ले आया।
विज्ञापन

लेकिन उनकी आंखों के सामने और लोग भी बह रहे थे, लेकिन विवश होकर सिर्फ देखते रहे। लेखपाल मातादीन ने बताया कि उसकी आंखों ने जो देखा वह कभी नहीं भूलेगा। नदी की धारा में एक-एक कर बहते लोग समाते चले जा रहे थे। उधर, मर्का गांव के बुजुर्ग रामफल ने बताया कि उसे भी असोथर गांव जाना था। लेकिन नाव में भीड़ देखकर वह नहीं गया। कहा कि नाव में बहुत भीड़ होने पर उसने नाविक को टोका था। भीड़ कम करने के लिए भी कहा। पर नाविक ने नहीं सुना। उसकी यह नादानी बड़े हादसे में बदल गई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें