‘बचाओ-बचाओ’ की चीख के अलावा कुछ नहीं सुनाई दिया
यमुना नदी में नाव पलटने के बाद बड़ा खौफनाक मंजर नजर आया। ‘बचाओ-बचाओ’ की चीखों के अलावा कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। 20-25 लोग तेज बहाव में बहते चले जा रहे थे। इनमें 5-6 ऐसी महिलाएं भी थीं जो अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में समेटे बहते हुए जिंदगी की गुहार लगाती रहीं। लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका।
नदी से सुरक्षित निकले प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां की घटना। यह दर्दनाक मंजर बचकर निकले लोगों ने बयां किया। मर्का गांव निवासी दुर्गेश ने बताया कि पतवार टूटने से घटना हुई। उसके साथ भांजा रामप्रतीत भी नदी की जलधारा में बहने लगा। उसने तैरकर अपने भांजे को कपड़ों के सहारे पकड़ा और सुरक्षित किनारे ले आया।
लेकिन उनकी आंखों के सामने और लोग भी बह रहे थे, लेकिन विवश होकर सिर्फ देखते रहे। लेखपाल मातादीन ने बताया कि उसकी आंखों ने जो देखा वह कभी नहीं भूलेगा। नदी की धारा में एक-एक कर बहते लोग समाते चले जा रहे थे। उधर, मर्का गांव के बुजुर्ग रामफल ने बताया कि उसे भी असोथर गांव जाना था। लेकिन नाव में भीड़ देखकर वह नहीं गया। कहा कि नाव में बहुत भीड़ होने पर उसने नाविक को टोका था। भीड़ कम करने के लिए भी कहा। पर नाविक ने नहीं सुना। उसकी यह नादानी बड़े हादसे में बदल गई।