बांदा। बरसात देर से शुरू होने की वजह से बुंदेलखंड में पड़ा सूखा सरकारी मानकों पर खरा नहीं उतरा। कृषि और राजस्व विभाग की ओर से किए गए संयुक्त सर्वे में यहां महज 10 से 15 फीसदी नुकसान बताया गया है। यह सर्वे मुख्यमंत्री के आदेश पर दोबारा किया गया है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
सर्वे में 33 से 50 फीसदी नुकसान की स्थिति को शून्य दर्शाया गया है। सरकारी मानकों के अनुसार 33 फीसदी से कम नुकसान होने पर किसान को फसल बीमा व कृषि अनुदान का लाभ नहीं मिलता है। ऐसे में किसान दोनों तरह की मदद से वंचित हो गए हैं। उधर, किसानों का कहना है कि बुंदेलखंड में सूखे की स्थिति बेहद गंभीर है। एक तो बारिश देर से हुई। दूसरी बात, औसत से 39 फीसदी कम हुई। बारिश समय से न होने से बड़ी संख्या में किसान खरीफ की बुआई नहीं कर पाए हैं।
बांदा में औसत से 74 फीसदी कम हुई बारिश
चित्रकूटधाम मंडल में पिछले चार माह में औसत 809.65 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। अब तक 497.29 मिलीमीटर बारिश हुई है। यानि औसत से 39 फीसदी बारिश कम हुई है। बांदा में औसत बारिश 850.60 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए।
यहां 312 मिलीमीटर बारिश हुई। यानि औसत से 74 फीसदी कम दर्ज की गई। दूसरे नंबर पर महोबा है। यहां पर औसत 768 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। यहां पर 365 मिलीमीटर बारिश हुई। यह औसत से 55 फीसदी कम है। लगभग यही स्थिति चित्रकूट और हमीरपुर में भी रही।
दावा 113 फीसदी हुआ आच्छादन
कृषि विभाग के अनुसार चित्रकूटधाम मंडल में खरीफ की बुआई का लक्ष्य 4,16,059 हेक्टेयर था। दावे के अनुसार मंडल में 4,16,586 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ की बुआई और धान की रोपाई की गई है। यह लक्ष्य के सापेक्ष 113 फीसदी है। हमीरपुर में 1,02,892, महोबा में 1,24,512, बांदा में 1,23,083, चित्रकूट में 66,099 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ की बुआई व धान की रोपाई की गई है।
33 फीसदी से कम नुकसान की रिपोर्ट (हेक्टेयर में)
जनपद बोई गई फसल प्रभावित फसल
बांदा 1,23,083 0951
हमीरपुर 1,02,892 1011
महोबा 1,24,512 2412
चित्रकूट 66,099 0520
योग- 4,16,586 4,894
कमासिन की सावित्री देवी का कहना है कि बारिश न होने से 40 फीसदी खरीफ की बुआई नहीं हो पाई है। जो बो दी गई है वह सूख रही है। सरकार को किसानों का दर्द समझ नहीं आ रहा है।
त्रिवेणी के किसान प्रमोद गौतम का कहना है कि सरकार फसल में क्षति का अनुमान लगा रही है। 50 फीसदी फसल सूखे के कारण बोई ही नहीं गई। वह तो शत प्रतिशत नुकसान के दायरे में आती है।
अगस्त में बारिश न होने से फसलें सूख रही थीं, लेकिन सितंबर में बारिश होने से फसल बेहतर हो गई है। सूखे से मंडल में फसलों को कोई खास नुकसान नहीं है।
राजीव कुमार झा, संयुक्त कृषि निदेशक, चित्रकूटधाम मंडल बांदा
प्रमोद गौतम।- फोटो : BANDA