बांदा। अतर्रा सीएचसी क्षेत्र के पचोखर गांव में डिप्थीरिया से ग्रसित बालक की मौत हो गई। गांव में इस मर्ज से यह पहली मौत है। गला घोंटू मर्ज से अब तक पांच बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। इसके पूर्व त्रिवेणी गांव में डिप्थीरिया (गलाघोंटू) मर्ज ने चार बच्चों को लील लिया। उधर, सीमावर्ती छतरपुर जिले के 9 वर्षीय बालक को डिप्थीरिया पॉजिटिव होने पर यहां जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है।
पचोखर गांव निवासी सत्यनारायण त्रिपाठी का पुत्र नकुल (8) कई दिनों से बीमार था। गले में सूजन और दर्द की शिकायत थी। करीब चार दिन रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज में उसका इलाज हुआ। बुधवार को हालत गंभीर होने पर डाक्टर ने उसे रेफर कर दिया। परिजन प्रयागराज ले गए। गुरुवार की शाम उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
उधर, सीमावर्ती छतरपुर (मध्य प्रदेश) जनपद के बसहरी गांव निवासी भूरेलाल का पुत्र अमित (9) की शुक्रवार को सुबह हालत बिगड़ गई। घरवालों ने उसे बांदा जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया है। उसे डिप्थीरिया के लिए आरक्षित वार्ड में रखा गया है। इस वार्ड में अब मरीजों की संख्या बढ़कर 5 हो गई। यहां पहले से त्रिवेणी, बिसंडा, पचोखर के बच्चे भर्ती हैं। फिजीशियन और ईएनटी विशेषज्ञ उनका इलाज कर रहे हैं। सीएमएस डा.एसएन मिश्र ने बताया कि डिप्थीरिया ग्रसित बच्चे की रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजी गई है।
सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि अमित की डिप्थीरिया जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर छतरपुर जिले के सीएमओ को अवगत कराया गया है। जिससे गांव में इस मर्ज के प्रसार को रोका जा सके। उन्होंने नकुल की मृत्यु की भी पुष्टि की। बताया कि गांव में स्वास्थ्य टीम भेजकर सर्वे कराएंगे। बीमार बच्चों का इलाज किया जाएगा। मौजूदा में मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में कुल 8 डिप्थीरिया संदिग्ध मरीज भर्ती हैं। अब तक 24 बच्चों का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। लेकिन रिपोर्ट सिर्फ सात की ही आई।