बांदा/तिंदवारी। जिले में डग्गामार वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं। कई वाहन बिना सवारी परमिट वाले हैं। यह सब पुलिस से साठगांठ से चल रहा है। आलम यह है कि वाहन में 25-25 सवारियां बैठाई जा रही हैं। छह सवारियां तो पीछे के एंगल पर खड़ी कर ले जाई जाती हैं।
बांदा से पैलानी, जसपुरा और भरुआ के लिए रोजाना करीब 50 डग्गामार वाहन नियमों को ताक पर रखकर सवारियां ले जा रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई ऐसे वाहन भी हैं, जिनमें सवारियां ले जाने की अनुमति नहीं है। इसके बाद भी यह वाहन बिना किसी डर के सवारियां ले जा रहे हैं।
इन वाहनों में अंदर जहां ठूंस ठूंसकर सवारियां भरी जाती हैं, वहीं पीछे एक दो नहीं बल्कि चार से छह लोगों को एंगल पर खड़ा कर दिया जाता है। ऐसे में इन सवारियों की जान जोखिम में रहती है।
कुछ ऐसा ही नजारा पपरेंदा पुलिस चौकी के सामने से सवारियां भरकर जा रहे वाहन में दिखा। इस वाहन में तकरीबन 20 से 25 सवारियां थी। इसमें छह सवारियां पीछे के एंगल पर लटकीं थी। वाहन पपरेंदा पुलिस चौकी के सामने से गुजरा, लेकिन पुलिस कर्मियों की नजर नहीं पड़ी।
यह सिर्फ एक वाहन की बात नहीं है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में इसी तरह के डग्गामार वाहन कमाई के चक्कर में सवारियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। ये डग्गामार वाहन देहात कोतवाली, पपरेंदा चौकी, पैलानी और जसपुरा थाने के सामने से सवारियां लटका कर प्रतिदिन बांदा से भरुआ के तीन से चार चक्कर लगाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक थाने में डग्गामार वाहन मालिकों की सांठगांठ है। इसके चलते कार्यवाहियों में केवल खानापूर्ति ही की जाती है।
देहात कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मिथलेश कुमार का कहना है कि अभी हाल ही में 30 वाहनों का चालान किया है, लेकिन ये मानते ही नहीं है, आरटीओ विभाग से ज्यादा प्रभावी कार्रवाई होती है, हम लोग तो केवल चालान करते हैं, वह कर रहे हैं।