बांदा/खप्टिया कलां। केन नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है। गंगऊ, बरियारपुर बांध के क्रस्टवाल से केन में आने वाले पानी में भी करीब 1.40 लाख क्यूसेक की कमी आई है। हालांकि यमुना 10 सेमी प्रति घंटा के गति से बढ़ रही है। यह खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर है। यमुना किनारे बसे करीब 12 गांव पानी से घिर गए हैं। प्रशासन ने बचाव एवं राहत कार्य शुरू कर दिया है।
मंगलवार को केन नदी का जलस्तर 105.52 मीटर पर था। यह खतरे के निशान से 1.52 मीटर ऊपर से बह रही थी। बुधवार को केन के जलस्तर में 52 सेमी की गिरावट आई है। हालांकि अभी एक मीटर खतरे के निशान से ऊपर है। गंगऊ बांध के अवर अभियंता धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गंगऊ व बरियारपुर बांधों से केन नदी में 3.57 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था, लेकिन अब 2.17 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है।
उधर, यमुना नदी अभी बढ़ रही है। मंगलवार को यमुना का जलस्तर 100.7 मीटर था। बुधवार को 40 सेमी ऊपर आ गया है। इससे पैलानी, जसपुरा, खप्टिया कलां आदि दर्जनों गांवों को बाढ़ से छुटकारा नहीं मिला है। गांव के संपर्क मार्ग मुख्य मार्गों से कट गए हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण खेतों में डेरा डाले हुए हैं। प्रशासन ने कुछ मदद पहुंचाई है।
कनवारा
सुबह करीब 11 बजे ज्यादातर ग्रामीण केन नदी के किनारे बैठे मिले। ग्रामीणों ने बताया कि केन का पानी गांव के मुहाने पर आ गया है। थोड़ा और बढ़ा तो मकान छोड़कर राहत चौकियों में जाना पड़ेगा। बुजुर्ग राम प्रसाद ने बताया कि भइया पानी कम होने लगा है। अच्छा भा नहीं तो बहुत दिक्कत होत है। कहा जान, पशुअन का कहा लै जान। गृहस्थी बहुत बर्बाद होत है।
समय-12 बजे।
ब्रम्हाडेरा में एसडीएम सुरभि व तहसीलदार पुष्कर ने जायजा लिया। बताया कि केन का पानी कम होने लगा, लेकिन सावधान जरूर रहे। एमपी में पानी बरसा तो बांधों का पानी फिर छोड़ा जा सकता है। उन्होंने स्कूल में बाढ़ पीड़ितों के ठहरने की व्यवस्थाएं देखी। छनिया डेरा में ग्रामीण खासे परेशान दिखे। एसडीएम से ग्रामीण बोले 2005 की बाढ़ के मकान तो बनवा नहीं पाए अब फिर बाढ़ आई तो बड़ी दिक्कत होगी। ऊंचे स्थानों पर आवासीय जमीन के पट्टे किए जाने की मांग की। एसडीएम ने लेखपाल को जमीन की उपलब्धता के निर्देश दिए।
खप्टियाकला : नरी गांव का पलरा मार्ग पर चंद्रपाल का परिवार केन के पानी में घिरा गया है। प्रशासन ने इनके बचाने के लिए कोई प्रबंध नहीं किए। दो किशोरी, चार किशोर सहित 10 लोग थे। छोटे-छोटे बच्चे पानी में तैरकर खाने पीने का सामान पहुंचा रहे हैं।
सिंधन खुर्द : दोपहर 1 बजे लक्ष्मी पत्नी मोहनलाल निषाद सीएचसी से प्रसव कराने के बाद गांव जाने के लिए पहुंची तो केन का पानी उफान पर था। किसी भी नाव वाले ने उन्हें नदी पार नहीं कराया। देर शाम तक वह नाव से गांव जाने का इंतजार करती रही। एसडीएम लाल सिंह ने चिल्ला में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
पैलानी : तुर्री नाले के ऊपर से बाढ़ का पानी बहने से सबादा, चंदवारा, बड़ागांव, पिपरोदर, पियासी डेरा, पडेरी, कानाखेड़ा, गलौली आदि के गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क कट गया। मरझा गांव में जान जोखिम में डालकर ग्रामीण नाले को पार कर रहे हैं।
कमासिन : यमुना का पानी औदहा में पुल से करीब 15 मीटर ऊपर से बह रहा है। इससे आवागमन बाधित है। औदहा सहित, खेरा और इटर्रा बढ़ानी गांव के कई मकान घिर गए हैं। सैकड़ों हेक्टेअर फसल जल मग्न हो गई।
तेंदूरा माइनर नहर पटरी टूटी, फसल जलमग्न
ओरन। नगर क्षेत्र के मसनी हार में तेंदूरा माइनर नहर की पटरी साइफन के पास दो जगह से टूट गई। इससे किसानों की कई बीघा फसल जलमग्न हो गई। पानी के तेज बहाव में फंसकर भैंस भी खत्म हो गई। किसान रामहित कुशवाहा, शिवकुमार कुशवाहा, लल्ला त्रिपाठी, राममूर्ति विश्वकर्मा, चुन्नू कुशवाहा आदि ने सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर नहर पटरी बनवाने की मांग की है। किसानों ने बताया कि शाहपुर माइनर की कोरिहा पुरवा संपर्क मार्ग के बगल से नहर पटरी कट जाने से फसल जलमग्न है। (संवाद)