बांदा। जमीन की सर्किल दरों में इजाफा किया गया है। यह इजाफा इलाके के हिसाब से है। कहीं 10 फीसदी तो कहीं 20 फीसदी सरकारी दरें बढ़ाई गई हैं। सबसे ज्यादा वृद्धि मुख्य मार्ग के किनारे की जमीनों में की गई है। इसके साथ ही जमीन और मकान खरीदना पहले से महंगा हो गया। निबंधन विभाग ने नई दरों से बैनामा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हर साल जमीनों की सरकारी दरों में फेरबदल किया जाता है। एडीएम उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि प्रतिवर्ष जमीन की सर्किल दरें उनकी वास्तविक बाजार दरों के अनुरूप तय की जाती हैं। कोरोना की वजह से 2018 से कोई बदलाव नहीं किया गया था।
अब स्थिति सामान्य होने पर 20 सितंबर से जिले में जमीनों की सर्किल दरें तय की गई हैं। शहर से सटे मुख्य मार्गों व बाईपास पर सड़क किनारे की जमीनों की सर्किल दरें 20 प्रतिशत और जनपद के अन्य शहरी क्षेत्रों में सड़क किनारे की जमीनों के रेट प्रति वर्ग मीटर 10 फीसदी तक बढ़ाए गए है।
राणा प्रताप चौकी से कचहरी होते हुए भूरागढ़, कचहरी चौराहे से अतर्रा चुंगी चौकी तक, कालू कुआं से सर्किट हाउस तक, सिविल लाइन से इंदिरा नगर नहर पुलिया तक की जमीन महंगी हो गई है। सब रजिस्ट्रार जितेंद्र कुमार यादव का कहना है कि कृषि भूमि को इस वृद्धि से अलग रखा गया है। कृषि भूमि की पुरानी ही दरें लागू रहेंगी।
ये हैं हाईवे व बाईपास की सर्किल दरें (प्रति वर्ग मीटर, रुपये में)
मुख्य मार्ग पुरानी दरें नई दरें
नवीन बाईपास में बबेरू चौराहा से चिल्ला रोड तक 8000 9000
मवई बाईपास में कृषि विश्व विद्यालय से कनवारा तक 7000 8000
कनवारा बाईपास से केन नदी पुल होते हुए महोबा रोड तक 6000 7000
शुकुल कुआं से तुलसी नगर होते हुए तिंदवारी रोड तक 10000 11000
पुराने बाई पास तिंदवारी रोड से बबेरू रोड तक 9000 10000
शहर में मुख्य मार्गों की नई सर्किल दरें (प्रति वर्ग मीटर, रुपये में)
मुख्य मार्ग पुरानी दरें नई दरें
अतर्रा चुंगी से राजकीय मेडिकल कॉलेज तक 14000 18000
बलखंडी नाका से कालवंन गंज डा. शरद क्लीनिक तक 22000 24000
जिला परिषद से अवस्थी भवन होते खुटला तक 20000 22000
बबेरू रोड पर कालू कुआं चौराहा से नहर सीमा तक 28000 31000
पुराने बाईपास से न्यू डाकबंगला तक 11000 12000
कृषि भूमि की दरें न बढ़ने से नुकसान
किसान नेता सुरेश का कहना है कि बाईपास और मुख्य मार्गों के किनारे की जमीनों की सर्किल दरें तो बढ़ा दी गई है, लेकिन कृषि भूमि की सर्किल दरें नहीं बढ़ाई है। इसकी मुख्य वजह है कि सरकार बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहीत कर रही है। किसानों का नुकसान होगा।
किसानों को नहीं मिलेगी वाजिब कीमत
रामभवन यादव का कहना है कि बाईपास व मुख्य मार्ग की सड़क किनारे की जमीनों के दाम बढ़ने से जमीनें महंगी हो गई है। गरीब को मकान खरीदना मुश्किल होगा। उधर, कृषि भूमि के दाम न बढ़ने से किसानों को खासा नुकसान होगा।
पांच सालों से जमीनों के दाम नहीं बढ़े थे। इस वर्ष सर्किल रेट में फेरबदल कर जमीन की सरकारी दरों को बाजार की दरों के अनुरूप किया गया है। हालांकि दरों में 10 से 20 फीसदी ही वृद्धि हुई है। -अखिलेश दुबे, एआईजी स्टांप।