बांदा। आयुर्वेदिक अस्पताल में दवाओं का टोटा पड़ गया है। बची-खुची पांच फीसदी दवाएं भी अस्पताल में नहीं बची हैं। तीन दिन पूर्व एक ट्रक दवाएं आई हैं, लेकिन दवाओं के इस्तेमाल के लिए फिलहाल आदेश का इंतजार है। प्रभारी चिकित्साधिकारी का कहना है कि दवाएं न होने के बारे में उच्चाधिकारियों को बताया है।
मंडी समिति परिसर में स्थित 15 शैय्या के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त दवाएं नहीं मिल पा रहीं। पहले से ही यहां दवाओं का टोटा था, अब बिल्कुल बचीखुची दवाएं भी नहीं बचीं।
इनमें अर्जुनारिष्ट, अश्वगंधारिष्ट, दशमूलारिष्ट, आरोग्यवर्धनी बटी, अविपत्तिकर चूर्ण, सुदर्शन चूर्ण, चंद्रप्रभा वटी, चित्रकादि गुटिका, कैशोर गुग्गुल, रसायन चूर्ण वटी, भास्कर लवण चूर्ण आदि दवाएं शामिल हैं। आलम यह है कि मरीज खुद जड़ी-बूटी ढूंढकर अस्पताल ला रहे हैं और अपना इलाज करा रहे हैं।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज सोनी ने बताया कि तीन दिन पूर्व एक ट्रक आयुर्वेद दवाएं आई हैं। उन्हें स्टोर में रखा गया है। हालांकि अभी तक इन दवाओं के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिली है। चिकित्साधिकारी ने बताया कि दवाएं खत्म होने के संबंध में उच्चाधिकारियों को बताया है। जब तक नई दवाओं के वितरण की अनुमति प्राप्त नहीं होती, वह अस्पताल में दवाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकते।