बांदा। पुत्री और भांजे को पीटने के केस में दो दोषियों को अदालत ने दो-दो वर्ष की जेल की सजा सुनाई है। तीन-तीन हजार रुपये जुर्माना भी किया। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह अतिरिक्त जेल होगी। अदालत से यह फैसला करीब 28 साल 8 माह में आया है।
नरैनी कोतवाली क्षेत्र के पिपरहरी गांव निवासी अनुसूचित जाति के रघुराई ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 18 जनवरी 1994 को शाम चार बजे उसका भांजा चुनुबाद उसके घर आ रहा था। स्कूल के पास गांव के पतरावल और रामनारायण ने घेर लिया और लाठियों से पीटने लगे।
उसे बचाने वह और पुत्री कल्ली पहुंची तो दबंगों ने उन्हें भी पीटा। पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध एससीएसटी एक्ट सहित कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। अभियोजन की ओर से छह गवाह पेश किए गए।
शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी) मोहम्मद कमरुज्जमां खान ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनीं। पतरावल और रामनारायण को दोषी पाते हुए धारा 325 में दो-दो साल की जेल की सजा सुनाई।
एससीएसटी एक्ट में एक-एक वर्ष की जेल और तीन हजार रुपये जुर्माना किया। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त जेल होगी। अन्य धाराओं में भी जेल व जुर्माना किया गया। सभी सजाएं साथ चलेंगी। विशेष लोक अभियोजक विमल सिंह, महेंद्र कुमार द्विवेदी व जावत्री प्रसाद विश्वकर्मा ने पैरवी की।