बांदा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 500 बेड के अस्पताल को 750 बेड में बदलने की मुख्यमंत्री की घोषणा के 14 माह बाद भी अमल नहीं हो सका। शासन को भेजे प्रस्ताव में इसके लिए कार्यदायी संस्था को लगभग 32 करोड़ 78 लाख 51 हजार रुपये की जरूरत है, लेकिन अब तक एक धेला तक नहीं मिला है।
मेडिकल कॉलेज में मौजूदा में 500 बेड का अस्पताल संचालित है। पिछले वर्ष 23 मई को यहां निरीक्षण में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 250 बेड और बढ़ाने के निर्देश दिए थे। शासन ने दिसंबर में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित कर दिया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वार्ड ब्लॉक के पास 1600 वर्ग मीटर जमीन चयनित कर नामित संस्था की ओर से तीन मंजिला भवन निर्माण का प्रस्ताव महानिदेशक चिकित्सा एवं शिक्षा लखनऊ को भेज दिया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन और कार्यदायी संस्था ने बजट के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा। फिर भी न बजट मिला और न निर्माण शुरू हुआ।
60 बेड की इमरजेंसी और 50 बेड का ट्रामा सेंटर मंजूर
मेडिकल कॉलेज में 60 बेड की इमरजेंसी और 50 बेड के ट्रामा सेंटर की शासन से मंजूरी मिल गई है। महानिदेशक चिकित्सा एवं शिक्षा के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पिछले माह उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से दोनों के अलग-अलग प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे हैं। प्रस्ताव के मुताबिक 60 बेड के इमरजेंसी वार्ड निर्माण में 22 करोड़ 57 लाख 36 हजार रुपये और 50 बेड के ट्रामा सेंटर पर 24 करोड़ 66 लाख 15 हजार रुपये खर्च होंगे। प्राचार्य डॉ. मुकेश यादव का कहना है कि फाइलें शासन स्तर पर लंबित हैं। बजट का इंतजार है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक ट्रामा सेंटर बनने पर दुर्घटना में घायलों को अच्छा इलाज मिल सकेगा। न्यूरो, आर्थो सर्जन और सर्जन की नियुक्ति होने पर मरीजों को कानपुर आदि रेफर नहीं करना पड़ेगा।