बांदा। कुमारी प्रीति की डोली के बजाए अर्थी उठी। जो मेहमान शादी में शरीक होने आए थे वह अंतिम संस्कार में शामिल हुए। मां संतो का साया प्रीति के सिर से उस वक्त उठ गया जब वह सिर्फ 10 वर्ष की थी। मां के मौत के बाद उसे घर का कामकाज संभालना पड़ा। पिता और बड़े भाई मंगल के साथ रह रही थी। भाई-पिता ने उसे स्कूल नहीं भेजा। पिता हीरालाल के पास चार बीघा का बगीचा है।