बांदा। शहर की गलियों और सड़कों की 800 से ज्यादा एलईडी लाइटें छह माह से खराब हैं। वहीं, 31 वार्डों में रोड लाइटें ठीक करने का जिम्मा सिर्फ दो गाड़ियों और तीन चालकों सहित 15 कर्मियों की तीन टीमों पर है।
विधायक निधि से सात प्रमुख चौराहों को हाईमास्ट स्ट्रीट लाइटों से तो रोशन कर दिया है, लेकिन गलियों और सड़कों का अंधेरा दूर करने के प्रयास नहीं किए गए। चुनाव की अधिसूचना के चलते एलईडी लाइटों की खरीद ही नहीं हो सकी। नगर पालिका क्षेत्र में 31 वार्ड हैं। इन वार्डों में पालिका ने पहले 4207 प्वाइंट बना रखे थे। इनमें 45 व 90 वॉट की एलडी लाइट लगवाई गई थी। नए बनाए गए तीन वार्ड शांति नगर, झील का पुरवा और इंदिरा नगर में लोकसभा चुनाव के पहले 800 प्वाइंट और बढ़ाए गए थे। इनमें करीब 25 लाख की लागत से लाइटें लगवाई गई थीं।
मौजूदा समय में शहर में पांच हजार प्वाइंट हैं। इनमें खाईंपार, गुलाबबाग, जरैली कोठी, स्वराज कालोनी, सिविललाइन, कालूकुआं बबेरू रोड, अलीगंज, डीएवी कॉलेज रोड में करीब आठ सौ प्वाइंटों पर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। यहां की लाइटें करीब छह माह से बुझी हैं। नगर पालिका अब लाइटों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करा रहा है। पांच सौ एलईडी स्ट्रीट लाइटें (45 व 90 वाॅट) की खरीदी जानी है, पर इस प्रक्रिया में अभी करीब माह भर का समय लग सकता है। तब तक शहरवासियों को अंधेरे में ही रहना होगा।
गलियों में अंधेरा होने की आईं 400 शिकायतें
नगर पालिका परिषद में एक माह के अंदर करीब चार शिकायतें सिर्फ रोड लाइट से संबंधित आई हैं। इन शिकायतों में एक का भी निस्तारण नहीं हो सका। दरअसल पालिका अब रोड लाइट की मरम्मत नहीं कराती, बल्कि खराब होने पर नई लाइट लगवाई जाती है।
नगर पालिका में न मैन पावर और न ही सुविधाएं
नगर पालिका के पास पांच हजार प्वाइंटों की लाइट की देखरेख के लिए सिर्फ तीन टीमें हैं, इसमें दो गाड़ी वाली और एक सीढ़ी वाली टीम है। प्रत्येक टीम में तीन-तीन कर्मी हैं। 31 वार्डों में लाइट से संबंधित शिकायतें आने पर इनके निस्तारण में हफ्तों का समय लग जाता है।
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वर्जन-
अधिसूचना के कारण तीन माह से लाइटों की खरीद नहीं हो पाई है। इसके पहले 25 लाख रुपये की लाइटें खरीदी गई थीं। अब नई लाइटों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। -मालती गुप्ता बासु, अध्यक्ष, नगर पालिका, बांदा।