बांदा। पालिका स्वच्छता को लेकर बेपरवाह है। शहर के कई मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। नाले-नालियां कचरे से पटे पड़े हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर भरा है। दुर्गंध व मच्छरों से लोग परेशान हैं।
शहर में 31 वार्ड और 50 से अधिक मोहल्लों में साफ-सफाई के लिए नगर पालिका परिषद के पास 100 से अधिक स्थायी व अस्थायी सफाई कर्मचारी हैं। पालिका परिषद प्रति माह साफ-सफाई में 60 से 70 लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन सफाई के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है।
शहर के खुटला, निम्नीपार, कांशीराम काॅलोनी, स्वराज, इंदिरा नगर, सुकुल कुआं की गलियों, शांति नगर, बंगालीपुरा, रामलीलाल रोड व अमर टाकीज आदि में कूड़े के ढेर लगे हैं। बारिश का पानी गलियों में भरा है। शुकुल कुआं निवासी संजय यादव का कहना है कि यहां महीने में एक दो बार ही सफाई कर्मचारी आता है।
गली का कचरा साफ करके नालियों में डाल देता है। नालियों का निकला कचरा कभी नहीं उठाता। अलबत्ता वह बारिश में कचरा बहकर पुन: नालियों में चला जाता है। नालियां कचरे से पटी है। इंदिरा नगर निवासी एसपी सिंह का कहना है कि यहां सफाई कर्मचारी कभी कभार ही आते हैं। नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं।
पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी बीपी यादव का कहना है कि सड़क, गली व नालियों की सफाई नियमित होती है। यदि कहीं समस्या है तो टीम भेजकर सफाई कराई जाएगी। कीटनाशन दवा का छिड़काव स्वास्थ्य विभाग के जिम्मे है।