बांदा। बारिश ने पांच साल का रिकाॅर्ड तोड़ दिया। 24 घंटे में 185 मिलीमीटर बारिश हुई। इससे हर तरफ पानी ही पानी नजर आया। नाली-नाले उफनाने से निचली बस्तियों के घरों और रास्तों पर एक से दो फीट पानी भर गया। रात भर लोग घरों से पानी को निकालते रहे। कमोवेश यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में भी रही। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 36 घंटे में 235 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पूरे माह में 319 मिलीमीटर बारिश रिकाॅर्ड की गई।
बारिश से नाली-नाले उफना गए। रविवार को शहर के पंकज नाला का पानी लोगों के घरों में घुस गया। झील का पुरवा, खुटला, परशुराम तालाब, जरैली कोठी आदि निचली बस्तियों में जलनिकासी की व्यवस्था न होने पानी लोगों के घरों में भर गया। सारी रात लोग पानी निकालते रहे। बाद में जेसीबी मशीन से नाली बनाकर पानी को निकाला गया। इसी प्रकार बलखंडी नाका, नुनिया मोहाल, शंभूनगर आदि में भी जल भराव से लोग परेशान रहे। रास्तों में पानी भरने से आवागमन अवरुद्ध रहा।
कमोवेश यहीं स्थिति गांवों की भी रही। बांदा शहर से जुडे मवई गांव में बारिश का पानी गलियों में भर गया। यहां नाबदान के रास्ते घरों के अंदर पहुंच गया। पानी से करीब छह कच्चे मकान भरभरा गए। एक बच्चा मकान के मलबे में दब गया। हालांकि समय रहते उसे बचा लिया गया। दैवी आपदा विभाग के अनुसार पारा बिहारी गांव में शनिवार की शाम शिव प्यारी का कच्चा घर गिर गया। दीवार के मलबे में आठ वर्षीय बच्ची दब गई। परिजनों ने तत्काल मलबा हटाकर बचा लिया। उसको मामूली चोटें आईं।
बारिश से तिल की फसल खराब
बाढ़ से बची खुची फसल बारिश ने तबाह हो गई। किसानों ने बताया कि पहले सूखे के कारण उर्द, मूंग की फसल नहीं हुई। तिल की फसल से कुछ आसरा दिखाई दे रहा था लेकिन दो दिन की बारिश से खेत खलिहानों में पड़ी तिल की फसल भी खराब हो गई है। धूप न निकली तो फसल सड़ जाएगी और सड़ांध पैदा हो जाएगी। हालांकि बारिश से धान व अरहर की फसल को फायदा है।