बांदा। फसल बीमा का करोड़ों रुपये प्रीमियम देने के बाद भी किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिल रहा है। खरीफ में बेमौसम बारिश से 25 फीसदी फसलें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। लेकिन बीमा कंपनी ने अभी तक 468 किसानों को महज दो करोड़ का क्लेम दिया है। इधर, रबी में ओलावृष्टि से फसलों को खासी क्षति हुई है, लेकिन कंपनी ने अभी तक एक भी मामले का निस्तारण नहीं किया, जबकि प्रीमियम के तौर पर कंपनी किसानों और सरकार से 18 करोड़ ले चुकी है।
किसानों को आड़े वक्त आपदा से फसलों के क्षतिग्रस्त होने पर मदद हो सके, इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी। खरीफ सीजन 2023 में जिले के ऋणी व गैर ऋणी 45971 किसानों ने 48877 हेक्टेयर फसल का बीमा कराया था। यूनिवर्सल कंपनी ने किसानों से चार करोड़ 68 लाख, केंद्रांश छह करोड़ 57 लाख, राज्यांश छह करोड़ 57 लाख मिलाकर 17 करोड़ 13 लाख रुपये प्रीमियम लिया। सितंबर, अक्टूबर में बेमौसम बारिश से 50 फीसदी फसलें खराब हो गईं। बीमा कंपनी ने महज 4235 किसानों के ही दावे स्वीकार किए और उन्हें महज 2 करोड़ 44 लाख का क्लेम दिया। अन्य किसानों के दावे यह कहकर खारिज कर दिए गए कि उनकी फसल को कंपनी के मानक के अनुरूप नुकसान नहीं हुआ है।
इसी प्रकार रबी सीजन 2024 में किसान व सरकारों से प्रीमियम के रूप में 19 करोड़ से अधिक प्रीमियम वसूला है। फरवरी व मार्च में ओलावृष्टि व बारिश से फसलों को खासा नुकसान हुआ। कई गांवों में फसल के नाम पर सिर्फ ठूठ ही रह गए। जिले में सात हजार किसानों ने क्लेम के लिए दावे किए, लेकिन कंपनी ने अभी तक एक भी दावे का निस्तारण नहीं किया, जबकि नियमानुसार कंपनी को 50 फीसदी से अधिक नुकसान पर क्लेम की 25 फीसदी राशि तत्काल देनी चाहिए।
ओलों से खराब हुई थी 8193 हेक्टेयर फसल
रबी सीजन में ओलावृष्टि व बारिश से नरैनी तहसील के सात गांवों में 5743 किसानों की 3436 हेक्टेयर, बबेरू के 22 गांवों के 1300 किसानों की 756 हेक्टेयर, पैलानी तहसील के 13 गांवों के 6,336 किसानों की फसल 50 फीसदी तक खराब हो गई थी। हालांकि प्रशासन ने इन्हें कृषि अनुदान दिया गया है, लेकिन बीमा कंपनी चुप्पी साधे है।
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कंपनी ने खरीफ फसल के नुकसान का क्लेम देना शुरू कर दिया है। रबी में क्राॅप कटिंग कराई जा रही है। इसके बाद ही क्लेम दिया जाएगा।
रवि कुमार, कोआर्डिनेटर पीएम फसल बीमा, बांदा