बांदा। बिजली बिल माफी की उम्मीद में किसान करोड़ों के कर्जदार हो गए। किसानों ने नलकूपों के बिजली बिल इसी उम्मीद में जमा नहीं किया कि सरकार इसे माफ कर दी। धीरे-धीरे जिले के 11 हजार से ज्यादा किसान 21 करोड़ रुपये से ज्यादा के बकायेदार हो गए। मुख्य अभियंता ने ऐसे किसानों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन्हें जल्द नोटिस जारी किया जाएगा।
विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों को रिझाने के लिए राजनैतिक दलों ने सत्ता में आने पर नलकूपों का बिजली बिल माफ करने व मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। भाजपा ने भी किसानों का बिजली बिल माफ करने का वादा किया था। भाजपा की सरकार बनने के बाद बिल माफ होने की उम्मीद में किसानों ने नलकूपों का बकाया जमा नहीं किया। विभागीय जानकारी के अनुसार नगरीय निकाय क्षेत्रों में सात हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ हजार किसानों के नलकूपों में बिजली के कनेक्शन हैं। इनमें 11 हजार से अधिक ऐसे किसान हैं जिन पर एक से दो लाख रुपये तक बकाया है। इन किसानों पर 21 करोड़ से अधिक का बकाया हो गया है। बिल माफी के संबंध में शासनादेश जारी नहीं होने की वजह से विभाग भी किसानों से वसूली के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है।
मुख्य अभियंता ने अधिशासी अधिकारियों से निजी नलकूप कनेक्शन धारकों के बकाए का ब्यौरा तलब किया है। विभागीय अधिकारी किसानों पर दबाव बना रहे है कि वह अप्रैल 2023 के पहले का बकाया जमा कर दें।
भाजपा ने किया था बिल माफ करने का वादा
महोखर के किसान चरन यादव का कहना है कि भाजपा ने चुनाव के दौरान नलकूप किसानों को मुफ्त बिजली देने सहित बकाए में रियायत देने की बात कही थी। दोबारा सरकार बनने के बाद न तो बिल माफ हुए न मुफ्त बिजली मिली।
जसपुरा के गौरीकला गांव निवासी राकेश का कहना है कि नलकूप किसानों को बिलों में रियायत देने व अप्रैल से बिजली फ्री देने की बात कही थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और अब लाखों के बिल का कर्ज बढ़ गया है। समझ में नहीं आ रहा कहां से जमा करूं।
वर्जन...
अप्रैल से नलकूपों को फ्री बिजली देने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी कोई आदेश नहीं आया है। किसानों को अप्रैल के पहले का बकाया जमा करना ही होगा। -प्रकाश देव, अधिशासी अधिकारी (शहर)।