बलरामपुर। जिले के 503 राजस्व ग्रामों में तीसरे फेज का ठोस व तरल कचरा प्रबंधन का कार्य शुरू नहीं हो सका है। फरवरी 2024 में ही भारत सरकार को 80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। बजट न मिलने से गांवों में स्वच्छता अभियान रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। इससे ग्राम पंचायतों को भी शहर जैसी सुविधाओं से लैस किए जाने की कार्ययोजना खटाई में पड़ गई है।
गांवों में लोगों को शहर जैसी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत तीसरे फेज में वित्तीय वर्ष 2024-25 में ठोस व तरल कचरा प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की गई थी। इसमें पहले व दूसरे चरण में छूटे सभी नौ विकास खंडों के 982 के सापेक्ष 503 राजस्व ग्रामों का चयन किया गया था। विकास खंड सदर में 134 के सापेक्ष 85, तुलसीपुर में 105 के सापेक्ष 74, श्रीदत्तगंज में 95 के सापेक्ष 38, रेहरा बाजार में 94 के सापेक्ष 51, गैंड़ास बुजुर्ग में 56 के सापेक्ष 27, गैंसड़ी में 131 के सापेक्ष 62, पचपेड़वा में 126 के सापेक्ष 58, उतरौला में 112 के सापेक्ष 33 व हरैया सतघरवा में 129 के सापेक्ष 75 राजस्व ग्रामों में ठोस व तरल कचरा प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करके भारत सरकार को भेजा जा चुका है।
-पहले व दूसरे फेज में 502 राजस्व ग्रामों का चयन किया गया था। पहले फेज में 47 राजस्व ग्रामों में ठोस व तरल कचरा प्रबंधन पर 28 करोड़ 72 लाख 30 हजार 312 रुपये खर्च किए गए थे। दूसरे फेज में 456 राजस्व ग्रामों में ठोस व तरल कचरा प्रबंधन पर 82 करोड़ 27 लाख 13 हजार 752 रुपये किए जा रहे हैं। इसमें स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण से 38 करोड़ 76 लाख 53 हजार 174 रुपये, मनरेगा, ग्राम निधि व अन्य से 43 करोड़ 50 लाख 60 हजार 578 रुपये खर्च किया जाना है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के जिला समन्वयक योगेश कुमार ने बताया कि चयनित राजस्व ग्रामों में ठोस में खाद गड्ढा, कंपोस्ट पिट, बायोगैस प्लांट, कचरा पात्र, प्लास्टिक बैंक, कचरा वाहन साइकिल व ई-रिक्शा, स्वच्छता किट में ड्रेस, फावड़ा, साबुन, सैनिटाइजर, ग्लव्स व कैप पर खर्च होगा। तरल में सोकपिट, नालियों पर सिल्ट कैचर, तालाबों व जलाशयों पर फिल्टर चैंबर, तालाबाें के सौंदर्यीकरण, यू टाइप व भूमिगत नाली निर्माण, वेस्ट स्टेबलाइजेशन पांड, हैंडपंप प्लेटफार्म, स्टार्म वाटर का निष्पादन व किचन गार्डन पर कार्य कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।