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बाढ़ और बारिश के बीच जिंदगी बचाने की कोशिश

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बलरामपुर। जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है तो उससे कोई बच नहीं पाता है। प्रकृति का यही रौद्र रूप जिले में इस समय दिखाई दे रहा है। चार दशक बाद विकराल रूप धारण कर आई बाढ़ सब कुछ तहस-नहस करने पर उतारू है। जिंदगी बचाने के लिए लोग जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं। घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने के बाद ट्रैक्टर-ट्राली व छतों पर सहारा लेने वाले ग्रामीणोंपर प्रकृति का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। बारिश के चलते न तो वह खुद खाना बना सकते हैं और न ही प्रशासन की ओर से पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। नौनिहाल व ग्रामीण भूख से बिलबिला रहे हैं। न तो भूख मिटाने के लिए खाना है और न प्यास मिटाने के लिए पानी।
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जिले में बीते पांच दिनों से बाढ़ की स्थिति काफी विकराल है। सैकड़ों गांव व आधा शहर बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। अमीर हाें या गरीब सभी घरों में कैद होकर रह गए हैं। जिन लोगों के पास दो मंजिला मकान है, उन्हें थोड़ी बहुत राहत मिल रही है। लेकिन उन गरीबों का संकट और भी बढ़ गया है, जो झोपड़ी में रहकर अपना दिन काटते हैं। पांच दिन से रुक रुक कर जारी बारिश के चलते आई बाढ़ के कारण गरीबों के समक्ष भूखों मरने की नौबत आ गई है।
बलरामपुर देहात निवासी जोखू प्रसाद, श्याम कली, राजेंद्र प्रसाद, मातादीन व मोबीन आदि ने बताया कि कोई भी स्थान सूखा न बचने के कारण खाना बनाने की जगह तक नहीं बची है। दूध, पानी व भोजन न मिलने से नौनिहाल भूख से तड़प रहे हैं। हम लोग तो भूख सह सकते हैं, लेकिन बच्चे जब भूख से तड़प कर रोते हैं तो बर्दाश्त नहीं होता। प्रशासन की तरफ से पहुंचाई जा रही मदद नाकाफी है।
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