बलरामपुर। विशेष सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट ने चार आरोपियों को दलित उत्पीड़न का दोषी करार दिया है। न्यायाधीश ने चारों दोषियों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक को 6700 रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
विशेष लोक अभियोजक एससी-एसटी एक्ट रणधीर सिंह ने बताया कि पचपेड़वा थाना क्षेत्र के हरहटी गांव निवासी लालमन ने 14 अगस्त 2011 को थाने में तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 13 अगस्त 2011 की रात में गांव के ही निजाम, मूसू, गुलाम हुसैन व ननके उनके घर में घुस आए और जातिसूचक गालियां देते हुए लात-घूसों से मारा-पीटा।
आरोप लगाया कि घटना में मेरे साथ आशीष व मंगरे प्रसाद को भी चोटें आईं। पुलिस ने मुकदमा लिखकर विवेचना शुरू की। तत्कालीन सीओ हरिगोविंद ने जांच के बाद आराेप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने छह गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट विनोद कुमार ने निजाम, मूसू, गुलाम हुसैन और ननके को दलित उत्पीड़न का दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने चारों दोषियों को तीन-तीन साल कैद और सभी को 6700-6700 रुपये अर्थदंड अदा करने की सजा सुनाई।