बलरामपुर। बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए जागरूकता अभियान तो चलाया जाता है लेकिन इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिले के अधिकांश सरकारी व अर्द्ध सरकारी भवन, निजी प्रतिष्ठान व निजी मकानों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था नहीं है। इससे बारिश का पानी नाले व नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है।
भूजल स्तर को सामान्य रखने के लिए सरकार द्वारा सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी व निजी भवनों और शाॅपिंग काॅम्प्लेक्सों में बारिश की बूंदों को संरक्षित करने के लिए वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन जिले में इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। भवनों की छत से पानी को निकालने के लिए पाइपों को नालियों से जोड़ दिया गया है। इससे बारिश का पानी सीधे नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है।
हाल में हुई बारिश से शहर में जगह-जगह जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। घरों का पानी संपर्क मार्गों पर फैल गया और धीरे-धीरे नालियों में बहकर बर्बाद हो गया।
यह हाल तब है जब हर साल सरकार की तरफ से बारिश के मौसम में भूजल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। इस बार भी 16 जुलाई से 22 तक जिले में भूजल सप्ताह मनाया गया। इसके तहत जिला प्रशासन की तरफ से पोस्टर, बैनर व होर्डिंग के माध्यम से लोगों को भूजल संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई। भूजल संरक्षण का दावा महज पोस्टर, बैनर व होर्डिंग तक ही सीमित होकर रह गया है।
शपथ पत्र देने पर स्वीकृत होता है नक्शा
सभी इमारतों के निर्माण के लिए मानचित्र की स्वीकृति लेनी होती है। यह तभी दी जाती है जब भवन स्वामी निर्माणाधीन भवन में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करने का शपथ पत्र देता है। यदि इसकी व्यवस्था नहीं की जाती है तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। नवविकसित काॅलोनियों की जांच कराई जाएगी। इसके बाद कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
- अजीत श्रीवास्तव, अवर अभियंता विनियमित क्षेत्र बलरामपुर।