बलरामपुर। जन्म देने के बाद भी नवजात को अपने सीने से चिपकाने की तड़प एक अभागी मां को माह पूरे एक माह तक तड़पाती रही। इस दौरान सपने में गूंजती लाल के रोने की आवाज ने मां पुष्पा को सोने नहीं देती थी। घरवालों ने भी उसे सदमे में मानकर चुप्पी साध ली थी। ऐसे में पुलिस ने भरोसा जताते हुए एक मां को ममता के साथ घर के सूने आंगन में मासूम की किलकारी गूंजाने की सौगात पूरे परिवार को दी।
मां की ममता निजी अस्पताल के स्टॉफ की इस बात को मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी कि उसका जना बच्चा मृत पैदा हुआ। गौरा चौराहा थाना के झौव्वा गांव की निवासी पुष्पा फिलहाल पुलिस निगरानी में अब अपने एक रिश्तेदार के यहां है। बुधवार को जब पुष्पा से मुलाकात की गई, तो उसकी आंखें भर आईं। आंसू पोछते हुए बताया कि बाहर वालों के साथ ही घर वाले भी उसकी बात पर भरोसा न कर डाक्टर की बात को ही सही मान रहे थे। लेकिन उसने अपने लाल को पाने की हर संभव कोशिश की।
बताया कि इस पूरे समय उसे ठीक से नींद तक नहीं आती थी। आंख बंद करते ही मासूम के रोने की आवाज उसे बेचैन कर देती थी। थकहार कर उसने हिम्मत जुटा कर पूरी घटना पुलिस को बताई। पुलिस ने भी उसकी बात पर पूरा भरोसा जताते हुए उसकी ममता को एक सौगात की तरह उसकी झोली में डाल दिया। जन्म देने के बाद से नवजात से दूर रहने का दंश मासूम को सीने से चिपकाते ही खुशी में तब्दील हो गया। वह अब पूरा समय अपने लल्ला को दुलराने में ही बिता रही है।
बच्चा बेचे जाने के मामले में बड़ी कार्रवाई के बाद मां पुष्पा देवी व नवजात की सुरक्षा के लिए पुलिस पूरी सतर्कता बरत रही है। प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने बताया कि अभी पुष्पा को उनके एक रिश्तेदार के यहां रखा गया है। मामले का खुलासा मां पुष्पा के हिम्मत जुटाने के कारण ही संभव हो सका। इस मामले में शामिल निजी अस्पताल के दोनों डाक्टरों को गिरफ्तार करने के बाद अब पुलिस बच्चा खरीदने वाले सभासद नासिर की तलाश में भी सरगर्मी के साथ जुटी है। पुलिस ने बढ़नी नगर पंचायत के सभासद की तलाश के लिए अलग अलग टीमें गठित कर बढ़नी पुलिस से भी समन्वय स्थापित कर रखा है।
नवजात को बेचने में निजी अस्पताल सील
पचपेडवा (बलरामपुर)। पचपेडवा में नवजात को बेचे जाने के मामले में स्वास्थ्य महकमे ने बुधवार को कड़ी कार्रवाई करते हुए मिशन अस्पताल एवं जच्चा बच्चा सर्जिकल केंद्र को सील कर इसका संचालन बंद करा दिया। सीएमओ डा. मुकेश रस्तोगी ने बताया कि निजी हॉस्पिटल बिना पंजीकरण के चल रहा था।
जांच में सामने आया कि सिद्धार्थनगर बढ़नी के बीयूएमएस डॉ. हफीजुर्रहमान ने नियमों को दर किनार कर महिला के प्रसव का आपरेशन किया था। वहीं संचालक मोहम्मद अकरम ने जानबूझकर आपरेशन के लिए ऐसे चिकित्सक को बुलाया जो आपरेशन करने की योग्यता नहीं रखता था। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. जय प्रकाश के साथ डा. विजय, लिपिक मोहनलाल जायसवाल, थानाध्यक्ष अवधेश राज सिंह के साथ पहुंची पुलिस टीम ने बुधवार को हास्पिटल को सील कर नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की। संवाद