बलरामपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के बीते 19 साल से बिना मान्यता के चलने का मामला विधानसभा की याचिका समिति में उठा है। उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव यतींद्र कुमार ने निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद से पूरी रिपोर्ट मांगी है। मानक पूरे होने के बाद भी मान्यता न दिए जाने पर विभाग से जवाब मांगा गया है। इससे डायट को मान्यता मिलने की आस बंधी है।
डायट की मान्यता के लिए विभागीय स्तर से भेजे गए मान्यता का आवेदन अभी तक शासन मेें लंबित है। इस कारण डीएलएड का शिक्षण कार्य भी बाधित हो रहा है। डायट के निर्माण की स्वीकृति साल 2004 में मिली थी। एक साल में ही वर्ष 2005 में इसका निर्माण भी पूरा हो गया। इसके बाद से मान्यता पाने के लिए आवेदन हुआ, तब से लिखापढ़ी चल रही है, लेकिन अभी तक मान्यता न मिलने के कारण डीएलएड (पूर्व में बीटीसी) का प्रशिक्षण यहां शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में जिले के छात्रों को डीएलएड प्रशिक्षण के लिए 70 किलोमीटर दूर गोंडा के दर्जीकुआं डायट में जाने की परेशानी उठाना पड़ रही है।
डायट को शुरूआत में कृषि जमीन को अन्य उपयोग के लिए परिवर्तित न कराने व बाद में सभागार व अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था न होने के कारण मान्यता नहीं मिली थी। मान्यता में अड़ंगा बनी यह अड़चन अब दूर हो चुकी हैं। इस संबंध में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन को कई बार पत्राचार किया जा चुका है।
बिना मान्यता के ही डायट में प्राचार्य के पर वरिष्ठ शिक्षाधिकारी हिफर्जुरहमान के साथ ही 12 प्रवक्ताओं की तैनात भी हो गई है। मान्यता के बगैर ही यहां एक आशुलिपिक, दो कनिष्ठ सहायक, चार चतुर्थ श्रेणी कार्मिक भी कार्यरत हैं।
डायट की मान्यता का मामला सदर विधायक पल्टूराम के माध्यम से सदन में पहुंचा। इसकी विधानसभा में याचिका बलरामपुर के देवेंद्र प्रताप सिंह की ओर से साल 2021 में दायर की गई थी। इसके बाद फिर महेश मिश्र की याचिका भी दायर हुई। अब विधानसभा से मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
सदर विधायक पल्टूराम ने बताया कि डायट की मान्यता जरूरी है, मान्यता न होने से जिले के युवाओं को डीएलएड का प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।