बलरामपुर के बड़ा परेड ग्राउंड के पास तैयार किया जा रहा रावण, कुंभकरण व मेघनाथ का पुतला।
बलरामपुर। नगर में दशहरा मेले का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है। बड़े परेड ग्राउंड पर आजादी के पहले से मनाए जा रहे दशहरा मेले में कई जनपदों के लोग शामिल होते हैं। इस वर्ष भी बड़े परेड ग्राउंड में रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। प्रशासन व आयोजक रावण दहन व दशहरा मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
बताया जाता है कि तत्कालीन महाराजा दिग्विजय सिंह ने 19वीं सदी में स्थानीय परेड ग्राउंड पर विजयदशमी महोत्सव एवं दशहरा मेला मनाने की परंपरा शुरू की थी। जुलूस में हाथी व घोड़े पर सवार होकर भगवान राम की सेना रावण का संहार करने के लिए यहां पहुंचती थी। राम व रावण की सेना में युद्ध होता था और बाद में रावण के पुतले का दहन किया जाता था। राजशाही खत्म होने के बाद सन 1950 में मेले के आयोजन की जिम्मेदारी श्री सनातन धर्म सभा बलरामपुर ने संभाल ली। राज परिवार एवं नगरवासियों के सहयोग से इस बार भी सनातन धर्म सभा की ओर से धूमधाम से विजयदशमी महोत्सव मनाया जाएगा।
सनातन धर्म सभा के मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि दशहरा मेले की तैयारी अंतिम चरण में है। दशहरा मेले का जुलूस 24 अक्तूबर को शाम 4.30 बजे सिटी पैलेस से निकाला जाएगा। जुलूस पुरानी चौक, वीर विनय चौराहा व पीपल तिराहा होते हुए माया होटल पहुंचेगा। यहां राज परिवार के सदस्य भगवान श्रीराम की आरती उतारेंगे। भगवान श्रीराम व रावण की सेना शाम करीब 6.30 बजे बड़ा परेड ग्राउंड पहुंचेगी। यहीं पर भगवान श्रीराम व रावण की सेनाओं के बीच युद्ध के बाद पुतलों का दहन किया जाएगा।