बलरामपुर। थारुओं की संस्कृति को संजोने के लिए पचपेड़वा के इमिलिया कोडर में थारू जनजाति संग्राहालय की स्थापना की गई है। जिसका लोकार्पण सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इसमें थारू जनजाति द्वारा रोजमर्रा की जरूरतों में प्रयोग किए जाने वाले लकड़ी व पत्तों से बने सामान और पारंपरिक परिधान आदि का प्रदर्शन किया गया है। थारुओं की प्राचीन परंपराओं को जनजन तक पहुंचाने के लिए सर्वेक्षण टीम अब नेपाल सहित अन्य देशों से भी सामान एकत्र करने की योजना बना रही है। इन वस्तुओं के प्रदर्शन से युवा जंगल के बीच रहकर जीवन यापन करने वाले थारू समुदाय की संस्कृति को आसानी से समझ सकेंगे।
थारुओं को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए नानाजी देशमुख ने इमिलिया कोडर से अपनी मुहिम शुरू की थी। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पर्यटन विभाग ने 33 करोड़ 59 लाख रुपये से पांच एकड़ में संग्रहालय का निर्माण कराया है। संग्रहालय में थारू महिलओं द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक परिधान, विभिन्न धातुओं के बने आभूषण, मिट्टी, लकड़ी व पत्तों के बने बर्तन, पौधों के रेसे, पत्ते व सीप से बने सजावट के सामान रखे गए हैं। साथ ही थारुओं द्वारा खेती में प्रयोग किए जाने वाली बैलगाड़ी, लकड़ी के बने औजार, खाल व सींग से बने वाद्ययंत्र और थारू हस्तशिल्प के स्टॉल भी लगाए गए हैं। थारू गांव व संस्कृति की झलक दिखाने के लिए यहां उनके शादी-विवाह, तीज त्योहार, रसोईघर, खेती-किसानी और गांव में सजने वाली दुकानों का सजीव चित्रण भी किया गया है।
मिट्टी कराती है जंगल का अहसास
पर्यटकों को गांव व जंगल का अहसास दिलाने के लिए वातानुकूलित संग्रहालय के फर्श को मिट्टी से बनाया गया है। संग्रहालय में पहला कदम रखते ही पर्यटकों को जंगल व गांव की अनुभूति होगी। कर्मचारी बताते हैं कि थारू परंपरा के अनुसार फर्श की गोबर व मिट्टी से लिपाई कराई जाती है।
सामान देने वालों का प्रदर्शित होगा नाम
संग्रहालय का लोकार्पण करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थारू समाज के लोगों से संग्रहालय के लिए घर की प्राचीन वस्तुएं दान करने का अनुरोध किया है। उन्होंने ऐसा करने वाले का नाम संबंधित वस्तु के नीचे लिखे जाने का आश्वासन भी दिया है।
नेपाल सहित अन्य देशों से लाया जाएगा सामान
संग्रहालय में थारुओं से जुड़ी प्राचीन वस्तुओं को संजोने के लिए चार थारू सहित छह सदस्यीय टीम कार्य कर रही है। अबतक लखीमपुर खीरी व बहराइच सहित कई जनपदों से सामान मंगवाया जा चुका है। समिति द्वारा चिन्हित किए गए कुछ सामान नेपाल व भूटान सहित अन्य देशों से भी मंगवाने की तैयारी की जा रही है।
- रामकृपाल शुक्ल, समन्वयक थारू संग्रहालय