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Balrampur News: मशरूम की खेती से आत्मनिर्भर बन रही थारू जनजाति

Tue, 30 Jan 2024 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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जरवा (बलरामपुर)। पिछड़े क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने में मशरूम की खेती काफी मददगार साबित हो रही है। थारू बाहुल्य क्षेत्र में इस खेती को अपना कर थारू जाति के किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इलाके में इसकी पहल रनियापुर के पहाड़ापुर गांव के रामसमूझ ने की। अब वह थारू जाति के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके चलते ही एक दर्जन से अधिक किसान अब मशरूम की खेती से जुड़ रहे हैं।
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किसान रामसमूझ ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन व अन्य माध्यमों से सीख कर मशरूम की फसल को तैयार किया। इसके लिए पहले मशरूम के बीज बोने लायक बेड तैयार किया। बताया कि 10 क्विंटल कंपोस्ट में तीन फीसदी गेहूं का चोकर, चार फीसदी मुर्गी की बीट, एक किलोग्राम यूरिया, दो किलोग्राम सुपर, पांच किलोग्राम जिप्सम मिलाया जाता है। इसके बाद हर तीन से चार दिन पर सात से आठ बार उर्वरक को पलटा जाता है। इसके बाद तैयार उर्वरक को बेड पर चढ़ा देते है।



एक दिन बाद मशरूम का बीज, जिसे सपान कहते हैं उसे उर्वरक में मिलाया जाता है। इसके 12 दिन बाद बाद बेड पर मशरूम का सफेद जाल बिछने के साथ फसल तैयार होने लगती है। करीब 280 स्क्वायर फीट से हर महीने 15 हजार तक का मुनाफा होता है। ठंड में मशरूम की मांग काफी बढ़ जाती है।
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जिले के थारू बाहुल्य गांवों के लोगों के लिए लघु सिंचाई विभाग भी सिंचाई की बेहतर सुविधा मुरैया कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विभाग की तरफ से भारत- नेपाल सीमा से सटे एक दर्जन गांवों का सर्वे किया गया है। इसके आधार पर किसानों को उथले पाने के नलकूप की सौगात भी मिलेगी।
पहाड़ी क्षेत्र से सटे कुशाहवा, बेतहनिया, मोहकमपुर, जरवा, कन्हईडीह, महादेवा आदि थारू बाहुल्स गांवों के लाेगों काे योजना से जोड़ा जाएगा। लघु सिंचाई के अवर अभियंता संदीप कुमार ने बताया कि 100 उथले नलकूप का लक्ष्य इन गांवों के किसानों के लिए मिला है। बताया कि उथले नलकूप में सौ फिट तक के बोरिंग विभाग की तरफ से की जाती है। इससे लोगों को अपने ही खेत में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
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