बलरामपुर। सोहेलवा क्षेत्र में छह बच्चों की मौत के बाद भी तेंदुए की दहशत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। वन विभाग अब तक इस इलाके से दो मादा व एक नर तेंदुए को पकड़ चुका है। इसके बाद सोहेलवा वन क्षेत्र से सटे गांवों में तेंदुए की चहल कदमी कायम बनी है। जंगल से आबादी क्षेत्र में आने वाले इन तेंदुओं का आतंक रोकने के लिए अब वन विभाग सोहेलवा जंगल के बार्डर पर सोलर फेंसिंग कराएगा।
सोहेलवा वन क्षेत्र में दो सौ तेंदुए
वन विभाग के स्तर पर तैयार इस कार्ययोजना पर करीब 20 करोड़ का खर्च आएगा। इस प्रोजेक्ट में आपदा व राहत विभाग वन विभाग की मदद करेगा। वन विभाग के अनुसार करीब 200 तेंदुआ सोहेलवा क्षेत्र में रहते हैं। फेंसिंग के बाद जंगल क्षेत्र से बाहर निकलते ही तेंदुए को बिजली का हल्का झटका लगेगा। इससे उसे आबादी क्षेत्र में आने से रोका जा सकेगा।
जंगल से सटे गांव क्षेत्र में बीते साल नवंबर माह से शुरू हुआ तेंदुए का आतंक करीब तीन माह बाद भी कायम बना है। इस दौरान तेंदुए के हमले से छह बच्चों की जान तक जा चुकी है। सोहेलवा क्षेत्र के लालनगर सिपाहिया, धर्मपुर, बेलवा सहित एक दर्जन गांव क्षेत्रों में तेंदुए का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
आबादी क्षेत्र में तेंदुओं का आतंक रोकने के लिए अब वन विभाग एक स्थाई कार्ययोजना को अमल में लाने की कवायद में जुटा है। इसके लिए पूरे सोहेलवा जंगल क्षेत्र का सर्वे हो रहा है। इसके माध्यम से जंगल के उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा जो सीधे तौर पर आबादी क्षेत्र से सटे हैं। इन्हीं जगहों को सोलर फेंसिंग लगा कर जंगली जानवरों से सुरक्षित बनाया जाएगा। इसके तहत बनकटवा रेंज में पहले चरण में तीन से पांच किमी तक सोलर फेंसिंग का जाल बिछान की तैयारी है।
डीएफओ एम. सेम्मारन ने बताया कि सोहेलवा क्षेत्र में सोलर फेसिंग का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। आपदा व राहत विभाग इसके लिए बजट तय करेगा। बजट स्वीकृत होते ही इस कार्ययोजना को अमल में लाने का कार्य शुरू होगा। इससे तेंदुए के साथ ही अन्य खूंखार जानवरों की आवाजाही को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने पर प्रभावी रोक लग सकेगी।