बलरामपुर के पीएचसी पिपरा में आयोजित जनआरोग्य मेले में पसरा सन्नाटा।
बलरामपुर। अवकाश के दिन मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए ग्रामीण अस्पतालों में लगने वाला मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला महज औपचारिकता भर रह गया है। कहीं पर डॉक्टर नदारद रहते हैं तो कहीं पर चतुर्थश्रेणी कर्मचारी मरीजों का इलाज करते देखे जा रहे हैं। मौसम में परिवर्तन के कारण संक्रामक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले सैकड़ों मरीजों को डॉक्टर न मिलने पर मायूस होकर वापस लौटना पड़ जाता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरा में रविवार की सुबह प्रभारी चिकित्साधिकारी नहीं थे। फार्मासिस्ट सौरभ चौबे भी अस्पताल से नदारद मिले। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जय किशन ने बताया कि पांच मरीजों को सर्दी-जुकाम व बुखार की दवा दी है। अस्पताल में दवा लेने आए ग्राम महुआ निवासी कल्लू ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर के न मिलने पर मजबूरन निजी में जांच करानी पड़ेगी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुगौली में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सत्येंद्र कुमार मौर्य मरीजों का इलाज करते मिले। उन्होंने बताया कि अस्पताल में संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक है। पीएचसी मथुरा बाजार में तैनात डॉ. रजत वर्मा ने बताया कि जन आरोग्य मेले में 35 मरीजों की जांच कर दवा वितरित की गई है। पीएचसी गुलरिहा में डॉ. राजेश कुमार मरीजाें का इलाज करते मिले।
जबकि पीएचसी इटई रामपुर में प्रभारी डॉ. मो. सिद्दीक नदारद मिले। फार्मासिस्ट संतोष कुमार सिंह मरीजों का इलाज करते देखे गए। डॉक्टर के नदारद रहने के संबंध में जब सीएचसी गैड़ास बुजुर्ग के अधीक्षक डॉ. शोएब अहमद से संपर्क करने का प्रयास किया तो उनको फोन नहीं उठा। पीएचसी महदेइया बाजार में चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव मरीजों का इलाज करते मिले। उन्होंने बताया कि दोपहर तक मेले में 41 मरीज आए थे। उनका इलाज कर दवाएं वितरित की गईं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
पीएचसी पिपरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। पीएचसी इटई रामपुर में आयोजित जन आरोग्य मेले में डॉक्टर मौजूद क्यों नहीं थे, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। जिले में 24 स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला आयोजित किया गया। इसमें 276 पुरुष, 284 महिला व 155 बच्चों सहित कुल 715 मरीजों का उपचार किया गया।
- डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ बलरामपुर